
- वाराणसी रिपोर्ट अजय सोनकर
आस्था, संस्कृति और अद्भुत सौंदर्य का प्रतीक देव दीपावली इस बार 5 नवंबर को मनाई जाएगी। इसे लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। गंगा तट पर जगमगाने वाली दीपों की यह अलौकिक छटा देखने के लिए न सिर्फ प्रदेश, बल्कि देशभर से हजारों पर्यटक काशी पहुंच रहे हैं।
बुकिंग फुल, होटल रूम्स के दाम छू रहे आसमान
वाराणसी में फाइव से लेकर टू-स्टार होटलों तक में बुकिंग जोरों पर है। 4 और 5 नवंबर की रात के लिए होटल रूम्स की भारी मांग के चलते दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। एक रात ठहरने का किराया 5 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
गंगा किनारे स्थित अधिकांश बड़े होटल पूरी तरह सोल्ड आउट हैं, जबकि थ्री और टू-स्टार होटलों के भी रेट दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। सबसे महंगे होटलों में पांडेयपुर का 36,600 रुपये और लक्सा का 31,890 रुपये का रेट दर्ज किया गया है।
क्रूज और नावों की एडवांस बुकिंग पूरी
गंगा पर चलने वाले क्रूज और नावें भी पहले से बुक हो चुकी हैं। सामान्य दिनों में जहां प्रति व्यक्ति क्रूज टिकट 700 रुपये होता है, वहीं देव दीपावली पर यही टिकट 15,000 रुपये तक पहुंच गया है — इसके बावजूद सब हाउसफुल हैं। छोटे बजड़े तक 5 लाख रुपये में बुक हो चुके हैं।
कारोबारियों में फिर लौटी रौनक
महाकुंभ के बाद सुस्त पड़े होटल और ट्रैवल व्यवसाय में देव दीपावली ने नई जान फूंक दी है। होटल, धर्मशाला, पीजी और गेस्ट हाउस सभी भरे हुए हैं। होटल मालिकों के साथ ट्रैवल एजेंसी, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों में भी खुशी की लहर है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गोकुल शर्मा ने बताया कि इस बार बुकिंग का स्तर उम्मीद से कहीं अधिक है।
गंगा किनारे और सारनाथ तक फैला ठहराव
गंगा घाटों के पास सभी होटल पूरी तरह बुक हैं। अब पर्यटक हाईवे, रिंग रोड और सारनाथ क्षेत्र के होटलों में कमरा बुक करा रहे हैं। यहां भी किराए दोगुने हो गए हैं, लेकिन कोई विरोध नहीं कर रहा। ट्रैवल एजेंसियां भी अपने मेहमानों के लिए सारनाथ और आसपास के होटलों में रुकने की व्यवस्था कर रही हैं।
जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
देव दीपावली के मौके पर होटल और नाव संचालकों द्वारा मनमाने दाम वसूलने की शिकायतें हर साल आती हैं। वाराणसी टूरिज्म गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस और पर्यटन विभाग इस पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाते। कई संचालक कमरे रोककर बाद में ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
काशी में तैयारियां चरम पर
शहर में इस बार करीब 3,000 से अधिक घाटों पर दीप जलेंगे। गंगा आरती और आतिशबाजी के बीच जब पूरा शहर सुनहरी रोशनी से नहाएगा, तब काशी की देव दीपावली एक बार फिर अपने नाम के अनुरूप “देवताओं की दीपावली” साबित होगी।
— रिपोर्ट: वाराणसी ब्यूरो



