
- वरिष्ठ संवाददाता: राजीव आनन्द
अमेठी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में 17 दिसंबर को हुए विवाद ने अब प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। लिपिक विकास तिवारी की ओर से यू.पी. एजुकेशनल मिनिस्ट्रियल ऑफिसर्स एसोसिएशन, जनपद अमेठी के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपे गए विधिवत लिखित शिकायती पत्र के बाद मामला केवल कार्यालयी विवाद न रहकर उच्च स्तरीय प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तक पहुंच गया है।
शिकायत पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, शिक्षा निदेशक सहित मंडल व प्रदेश स्तर के अधिकारियों को भेजे जाने से प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है।
शिकायत के अनुसार, लिपिक विकास तिवारी 17 दिसंबर 2025 को निर्धारित प्रक्रिया के तहत चार्ज हस्तांतरण के लिए बीएसए कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान उनके कक्ष में प्रांतीय शिक्षक संगठन के पदाधिकारी पहुंचे, जहां कहासुनी के बाद गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी देने जैसी स्थिति उत्पन्न हुई।
विकास तिवारी ने तत्काल दूरभाष के माध्यम से बीएसए को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, जिस पर शांति बनाए रखने की बात कही गई। संघ पदाधिकारियों के पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि लिपिक अपने शासकीय दायित्वों के निर्वहन हेतु उपस्थित थे और उनकी ओर से किसी प्रकार की उकसावे वाली या अनुचित कार्रवाई नहीं की गई।
महत्वपूर्ण यह है, कि इस प्रकरण की प्रतिलिपि जिन अधिकारियों को भेजी गई है, उनमें जनपद से लेकर मंडल व प्रदेश स्तर तक के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। इससे यह संकेत स्पष्ट है, कि यदि जिला स्तर पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो मामला उच्च स्तर पर स्वतः संज्ञान में चला जाएगा।
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि जब जिला मुख्यालय स्थित बीएसए कार्यालय में अनुशासन की यह स्थिति है, तो परिषदीय विद्यालयों और ब्लॉक स्तर के कार्यालयों में कार्य संस्कृति की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
गौरतलब है, कि इस विवाद को लेकर पहले अमर उजाला में समाचार प्रकाशित हो चुका है, जिसमें दोनों पक्षों के आरोप सामने आए थे। अब लिपिक विकास तिवारी की लिखित शिकायत के साथ मामला दस्तावेज़ी रूप में दर्ज हो जाने से प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
बीएसए संजय कुमार तिवारी ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में है, और लिखित शिकायत प्राप्त होने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालयीन अनुशासन सर्वोपरि है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कर्मचारियों, शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है, कि बीएसए कार्यालय परिषदीय विद्यालयों का शीर्ष कार्यालय है।
यदि यहां अनुशासन और कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगते हैं, तो इसका सीधा असर स्कूलों तक जाता है। ऐसे में इस प्रकरण में त्वरित, पारदर्शी और ठोस कार्रवाई न केवल एक कर्मचारी को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक है, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग में अनुशासन और भरोसा कायम रखने के लिए भी अनिवार्य मानी जा रही।




