
वाराणसी, पंकज झां । काशी राज काली मंदिर से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। आस्था के इस प्राचीन केंद्र पर इन दिनों अतिक्रमण और अवैध कब्जे का ऐसा जाल फैल चुका है कि मंदिर का अस्तित्व ही खतरे में दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, मंदिर के चारों ओर भू-माफियाओं ने सुनियोजित तरीके से कब्जा जमा लिया है। कभी मंदिर के रास्ते पर गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं, तो कभी गमले और पेड़ लगाकर रास्ता संकरा कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर अंदर जाने वाले रास्ते तक बोर्ड और अवैध ढांचों के जरिए पूरी तरह घेराबंदी कर दी गई है।
स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रास्ते की चौड़ाई कम कर दी गई है, जिससे आने-जाने में बाधा उत्पन्न हो रही है। यह न सिर्फ अतिक्रमण है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था के साथ खुला खिलवाड़ भी है।
मामले को और गंभीर बनाता है यह आरोप कि मंदिर परिसर के आसपास अवैध रूप से रेस्टोरेंट चलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन रेस्टोरेंट्स में कुछ पुलिसकर्मियों की नियमित आवाजाही देखी जाती है। आरोप यहां तक हैं कि पुलिसकर्मी वहीं बैठकर भोजन करते हैं, जिससे रेस्टोरेंट संचालकों और भू-माफियाओं का मनोबल और बढ़ गया है। उन्हें यह विश्वास हो गया है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले को लेकर कई बार अखबारों में खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं और प्रशासन को भी बार-बार अवगत कराया गया है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
👉 क्या प्रशासन इस पूरे मामले से अनजान है या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है?
👉 बार-बार शिकायतों और मीडिया में खुलासे के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
👉 क्या भू-माफियाओं को किसी प्रभावशाली संरक्षण का साथ मिला हुआ है?
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में इस मुद्दे को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही अतिक्रमण हटाकर मंदिर को मुक्त नहीं कराया गया, तो यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
आस्था के इस प्राचीन स्थल पर कब्जे और प्रशासन की चुप्पी ने कानून व्यवस्था और शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागेगा और क्या वाकई काशी राज काली मंदिर को इस अवैध कब्जे से मुक्ति दिलाने के लिए कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा या फिर यह मामला यूं ही फाइलों में दबा रह जाएगा।



