
लखनऊ: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी के लिए गोविंदगंज सीट बीजेपी से नहीं ले पाए। बीजेपी ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार को उतारने का फैसला किया है।
गोविंदगंज सीट पर बीजेपी का कब्जा
गोविंदगंज सीट वर्तमान में बीजेपी के पास है, और इस सीट से बीजेपी के सुनील मणि तिवारी मौजूदा विधायक हैं। चिराग पासवान की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी 2015 में इसी सीट से विधायक चुने गए थे। इसलिए यह माना जा रहा था कि चिराग पासवान अपने पार्टी के प्रमुख चेहरे राजू तिवारी के लिए गोविंदगंज सीट हर हाल में हासिल करेंगे। पिछले तीन दिनों से चर्चा थी कि बीजेपी इस सीट को चिराग के लिए छोड़ने को तैयार है।
सुनील मणि तिवारी को बीजेपी की हरी झंडी
बीजेपी ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए अपने मौजूदा विधायक सुनील मणि तिवारी को गोविंदगंज से चुनाव लड़ने की मंजूरी दे दी। पार्टी आलाकमान से हरी झंडी मिलने के बाद तिवारी ने अपने समर्थकों के साथ बैठक की और 17 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की घोषणा की। इससे साफ है कि बीजेपी ने अपनी सीटिंग सीट चिराग पासवान को देने से इनकार कर दिया।
चिराग की रणनीति पर सवाल
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि चिराग पासवान ने गोविंदगंज सीट के लिए ज्यादा जोर नहीं दिया। चिराग के साथ लंबे समय तक काम करने वाले एक नेता ने बताया कि चिराग किस आधार पर उम्मीदवारों को टिकट देते हैं, यह 2024 के लोकसभा चुनाव में स्पष्ट हो चुका है। उनके अनुसार, चिराग के टिकट वितरण के मानदंडों पर राजू तिवारी खरे नहीं उतरते। इसीलिए यह दिखावा किया गया कि चिराग गोविंदगंज सीट के लिए अड़े थे, जबकि उनकी प्राथमिकता उन सीटों पर थी, जहां उनके मानदंडों पर फिट बैठने वाले उम्मीदवार पहले से तैयार हैं।



