
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: शिक्षा विभाग में अब नया फार्मूला चल रहा है –“बचाओ बड़े अफसर, फँसाओ छोटे कर्मचारी।”
मुरसान ब्लॉक के सरकारी स्कूल भवन निर्माण घोटाले में यही खेल सामने आया है। शिकायत थी— “भवन में घटिया सामग्री लग रही है।” मामला था बच्चों के भविष्य का, लेकिन जांच भवन की जगह कंप्यूटर ऑपरेटर की हो गई!
जनसुनवाई पोर्टल का खेल
आईजीआरएस संदर्भ संख्या 92514400011049 पर शिकायत दर्ज हुई। यह फाइल सीधे जिला समन्वयक निर्माण के पास जानी चाहिए थी।
बीईओ गिरिराज सिंह ने जनसुनवाई पटल सहायक को आदेश दिया- “शिकायत डीबीएसईओ को ट्रांसफर करो।”
लेकिन कंप्यूटर ऑपरेटर सौरभ वार्ष्णेय को दे दिया नोटिस, तबकी पटल सहायक की होती है जिम्मेदारी
जब फीडबैक बिगड़ा और शिकायत सही तरीके से ट्रांसफर नहीं हुई, तो बीईओ ने पूरा ठीकरा छोटे कर्मचारी पर फोड़ दिया और खुद कुर्सी बचाने में लग गए।
जबकि उस समय जनसुनवाई पटल का बाबू था प्रमोद शर्मा,ओर सौरभ तो सिर्फ कंप्यूटर ऑपरेटर था। फिर भी सारा आरोप उन्हीं पर डालकर नोटिस थमा दिया गया।
यानी “बड़े बचाओ, छोटे फँसाओ” का खुला खेल।
मुख्यमंत्री की मंशा पर चोट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसुनवाई पोर्टल बनाया ताकि आम जनता की सीधी सुनवाई हो सके।
लेकिन हाथरस शिक्षा विभाग ने इसे बना दिया— जनता की नहीं, अफसर की सुनवाई पोर्टल।
जनता की शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय असली गुनहगार बचा लिए गए और छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बना दिया गया।
अगर स्कूल भवन में घटिया सामग्री लगी, तो बीईओ पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जब जनसुनवाई पटल का बाबू प्रमोद शर्मा था, तो ऑपरेटर को क्यों फँसाया गया?
क्या हाथरस में जनसुनवाई पोर्टल को सचमुच जनधोखा पोर्टल बना दिया गया है?
क्या मुख्यमंत्री तक यह सच दबाकर न पहुँचाने की साज़िश चल रही है?
मुख्यमंत्री योगी का साफ आदेश है – “भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा।”

लेकिन हाथरस शिक्षा विभाग में उनकी मंशा को धता बताकर घोटाले पर पर्दा डालने का खेल खेला जा रहा है।
अब जनता मांग कर रही है— “मुख्यमंत्री जी, हाथरस शिक्षा विभाग की हकीकत खुद देखें, ताकि असली गुनहगार जेल में हों और छोटे कर्मचारी बलि का बकरा न बनें।”
हाथरस शिक्षा विभाग की फाइलों में भ्रष्टाचार की नई इबारत लिखी जा रही है।
जनता कह रही है— “योगी जी, स्कूल की दीवारों में सीमेंट कम और घोटाले का मसाला ज्यादा मिला है।”





