
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या: जनपद में इन दिनों यूरिया खाद की भारी किल्लत से किसान परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी किसानों को केवल एक बोरी खाद ही मिल पा रही है। खेतों की बुआई का समय होने के कारण किसान हर हाल में खाद जुटाने को मजबूर हैं, लेकिन यूरिया की कमी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
जिला कृषि अधिकारी बोले: “जनपद में नहीं है खाद की किल्लत”
यूरिया की इस किल्लत पर जिला कृषि अधिकारी का बयान चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि जनपद में यूरिया खाद की कोई कमी नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, जो कि फसलों और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक है।
किसानों को दी सलाह, “यूरिया का अधिक प्रयोग न करें”
कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की कि यूरिया का संतुलित उपयोग करें और वैकल्पिक उर्वरकों का भी प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि अधिक यूरिया खाद का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को कम करता है और यह खेती के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

जागरूकता पर उठे सवाल
हालांकि, कृषि विभाग का यह बयान कई सवाल खड़े करता है। अगर हर वर्ष ब्लॉक स्तर पर कृषि मेले और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, तो फिर किसान अब तक यूरिया के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक क्यों नहीं हो पाए हैं? क्या यह विभाग की योजनाओं की विफलता का संकेत है?
किसानों का कहना है कि उन्हें खाद की ज़रूरत खेती के लिए है, और जब तक वैकल्पिक व्यवस्था ठीक से नहीं होगी, तब तक यूरिया पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।





