
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। सामाजिक समरसता के उद्देश्य से आयोजित सम्मेलन में गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ एवं काशी के डोम राजा वंशज संजीत चौधरी को याद किया गया। विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष भिखारी प्रजापति ने कहा कि 19 फरवरी 1980 को मीनाक्षीपुरम में हुई सामूहिक धर्मांतरण की घटना से आहत होकर महंत अवेद्यनाथ ने 18 मार्च 1994 को काशी में धर्माचार्यों व संतों के साथ सहभोज का आयोजन किया था। यह सहभोज डोम राजा वंशज संजीत चौधरी के मान मंदिर स्थित शेर वाली कोठी पर हुआ, जिसमें वृहद हिंदू समाज को एकजुट करते हुए छुआछूत को शास्त्रविरुद्ध घोषित किया गया।यह बातें उन्होंने हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय के सभागार में आयोजित समरसता सम्मेलन में कहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मातृशक्ति जिलाध्यक्ष श्रीमती नंदिता चटर्जी ने की, जबकि संचालन संगीता मिश्र और मनोज प्रजापति ने किया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक नीरज दुबे एवं प्रधानाचार्य विजय कुमार मिश्र दीप प्रज्ज्वलन में उपस्थित रहे। सम्मेलन में प्रदेश उपाध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह, जय शंकर केसरी, रुद्र कुमार पाठक, धीरेंद्र प्रताप सिंह, मनोज कुमार श्रीवास्तव, प्रवीण सिंह चंदेल, नीलम गिरी, चंद्रचूड़ पांडे, राधा सिंह, बिंकर शुक्ल सहित अन्य वक्ताओं ने 18 मार्च 1994 को सामाजिक समरसता की दृष्टि से ऐतिहासिक तिथि बताया।
कार्यक्रम में सुमन पटेल, अनुराधा गिरी, तपेश्वर चौधरी, रीता तिवारी, प्रमोद मिश्र, सुषमा श्रीवास्तव, आशीष राज गुप्त, अनीता चौधरी, चंदा चटर्जी, शंभूनाथ केसरी, गुड्डू किन्नर, अनुराधा सिंह, विजेता केसरी, वीर बहादुर मौर्य, माधवी श्रीवास्तव, गुड्डू पांडे, शशि प्रकाश, चंदा केसरी, डॉ. प्रशांत चतुर्वेदी, बृजेश बारी, महिमा केसरी, गोपाल प्रसाद, जयप्रकाश सोनी, पुनीत केसरी सहित अनेक लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
सम्मेलन के उपरांत खिचड़ी सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में काशी संभाग प्रभारी मनोज श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।



