
- रिपोर्ट: शुभम
बाराबंकी।
बाराबंकी जिले के ग्राम पंचायत फतेहसराय (विकासखंड–बंकी) में ग्राम प्रधान सचिन वर्मा के द्वारा विकास कार्यों में अनियमितताओं और शासकीय धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। जिला मजिस्ट्रेट बाराबंकी द्वारा इस प्रकरण में कार्रवाई करते हुए उच्च स्तरीय संयुक्त जांच टीम गठित की गई है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायतकर्ता दिलीप कुमार, पुत्र शमशेर प्रसाद, निवासी ग्राम फतेहसराय ने नोटरी शपथपत्र के माध्यम से जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को कई विस्तृत शिकायत भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम प्रधान सचिन वर्मा ने ग्राम सभा की भूमि नवीन परती, बंजर, तथा तालाब की भूमि पर विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों में भारी अनियमितताएं की हैं। आरोप है कि इन कार्यों के नाम पर सरकारी धन का अनुचित उपयोग किया गया और वास्तविक धरातल पर कार्य अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं कराए गए।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्राम प्रधान द्वारा सरकारी धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई और ग्राम पंचायत की महत्त्वपूर्ण संपत्तियों पर कार्यों की गुणवत्ता तथा प्रकृति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की थी।
जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी पत्र के अनुसार।
भूमि संरक्षण अधिकारी (कुर्सी),
तहसीलदार नवाबगंज,
सहायक अभियंता (जल निगम) तथा
जिला लेखा परीक्षा अधिकारी (सहकारी समितियां एवं पंचायते) बाराबंकी
को संयुक्त रूप से जांच अधिकारी नामित किया गया है।
यह जांच उत्तर प्रदेश पंचायत राज (प्रधानों एवं सदस्यों को हटाया जाना) जांच नियमावली, 1997 तथा पंचायती राज विभाग और लेखा परीक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिकायत पत्र में उल्लेखित प्रत्येक बिंदु की भौतिक तथा अभिलेखीय जांच कर सुस्पष्ट टिप्पणी सहित आख्या प्रस्तुत की जाए।
जांच टीम को एक सप्ताह के भीतर अपनी संयुक्त रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय में उपलब्ध करानी है, ताकि प्रकरण में आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को गंभीर कदम माना जा रहा है, क्योंकि पंचायत स्तर पर अनियमितताओं के आरोप अक्सर सामने आते हैं, लेकिन उच्च स्तरीय संयुक्त जांच टीम का गठन प्रशासन की सख्त मंशा का संकेत देता है। ग्रामीणों में भी इस जांच को लेकर उत्सुकता और उम्मीद बढ़ गई है कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ेगी।


