
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: कोतवाली सदर क्षेत्र स्थित इंद्रा गाँधी गर्ल्स जूनियर हाईस्कूल में हुए फर्जी नियुक्ति घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। विद्यालय प्रबंधक द्वारा कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर 15 शिक्षकों की नियुक्ति किए जाने के मामले में अब एफआईआर दर्ज होने जा रही है।
हालांकि इस गंभीर मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) का रवैया पहले दिन से ही लापरवाही भरा रहा। प्रबंधक को 13 बार नोटिस दिए गए, मूल प्रमाणपत्र पेश करने और BSA कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन विद्यालय प्रबंधक हर बार आदेशों की अनदेखी करता रहा।
बावजूद इसके, बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वाति भारती द्वारा समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब मामला अपर जिलाधिकारी (ADM) ने इस पर सख्त नाराजगी जताई, तभी जाकर BSA हरकत में आईं और FIR के आदेश दिए।

सूत्रों के अनुसार, ADM ने BSA को फटकार लगाई और पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी नियुक्तियां कैसे हुईं और अभी तक कठोर कदम क्यों नहीं उठाए गए। ADM की सख्ती के बाद ही प्रकरण में कुछ हलचल हुई।

यह पहला मामला नहीं है जब बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा के नाम पर हुए फर्जीवाड़ों में धीमी कार्रवाई की हो। जिले में पहले भी कई मामलों की शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन जब तक मामला जिला अधिकारी या ADM के संज्ञान में नहीं आता, तब तक BSA कार्यालय से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
क्या शिक्षा विभाग लापरवाही का अड्डा बन चुका है?
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर शिक्षा की बुनियाद में भ्रष्टाचार को क्यों अनदेखा किया जा रहा है? क्या बिना ADM की फटकार के कोई कार्रवाई नहीं होती? यदि ADM सक्रिय न होते, तो क्या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाता?





