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काशी में 3 करोड़ की चोरी और 48 घण्टे में खुलासा, विश्वासघात पर टिकी थी 3 करोड़ की चोरी की बुनियाद

तेजतर्रार आईपीएस सरवणन टी ने घटना को लिया चुनौती के रूप में और 48 घण्टे में कर दिया खुलासा, पूरा 3 करोड़ का माल बरामद

  • रिपोर्ट: पंकज झा

वाराणसी। देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी, जहां का हर एक कोना इतिहास की गवाही देता है, वहां एक ऐसी बड़ी चोरी हुई जिसने वाराणसी कमिश्नरेट की पुलिस को खुली चुनौती दे डाली। चौक थाना क्षेत्र के कर्णघंटा मोहल्ले में प्रतिष्ठित आभूषण कारोबारी दिवाकर राणा के मकान की तिजोरी से 2 किलो 122 ग्राम से ज्यादा सोने के आभूषण गायब हो गए जिनका बाजार मूल्य करीब 3 करोड़ रुपये था, वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी स्वर्ण चोरी थी।सब कुछ इतना साफ-सुथरा था कि बाहर से कोई शक नहीं होता। ताले ज्यों के त्यों, दीवार में सेंध नहीं, कोई जबरन घुसपैठ के निशान नहीं। जैसे कोई घर का ही सदस्य रातों-रात सब कुछ उठाकर ले गया हो।

कारोबारी को जब 6 जनवरी को चोरी का पता लगा तो दिल बैठ गया। शिकायत दर्ज हुई, और पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई। जांच की शुरुआत हुई तो शक की सारी सुई घर के केयरटेकर तारक घोराई पर टिक गई। जाँच में यह भरोसेमंद नौकर ही मास्टरमाइंड निकला। छह महीने पहले से उसने इस साजिश की नींव रख दी थी। गाजीपुर के विकास बेनवंशी ने उसे शराब के नशे में डुबोकर अपना गुलाम बना लिया। फिर पांच दोस्तों का यह गिरोह काम में जुट गया—डुप्लीकेट चाबी बनवाई, रात के सन्नाटे में तिजोरी खोली और पूरा माल बाहर निकाल लिया।

प्लान इतना पक्का था कि सोचते थे—पुलिस कभी नहीं पकड़ेगी।लेकिन अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों, एक छोटी सी चूक सब बिगाड़ देती है। सीसीटीवी फुटेज में एक आरोपी सैनुद्दीन अंसारी की कुनकुनाती चाल पकड़ में आई। यही छोटी सी गलती पुलिस के लिए सोने की खान साबित हुई। एडीसीपी काशी सरवणन टी. की दूरदर्शी रणनीति, एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी की कमान, एसओजी प्रभारी गौरव कुमार सिंह और चौक इंस्पेक्टर दिलीप मिश्र की फील्ड टीम की बिजली सी तेज कार्रवाई से महज 48 घंटे में पूरा गिरोह धर दबोचा गया।

पुलिस ने गिरोह में शामिल पांचों को पकड़ा और शत-प्रतिशत सोना बरामद कर लिया।यह सिर्फ एक चोरी का खुलासा नहीं था, बल्कि विश्वासघात, लालच और तकनीक के बीच की जंग थी केयरटेकर की ‘डबल गेम’ ने साबित कर दिया कि घर का सबसे करीबी भी कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने टीम की इस अद्भुत सफलता पर 1 लाख रुपये का नगद इनाम घोषित किया।इस बड़ी घटना कें तत्काल खुलासे से अपराधियों को एक बार फिर एहसास हो गया—काशी में चोरी की गुंजाइश नहीं, क्योंकि यहां पुलिस अब पहले से कहीं ज्यादा सजग, स्मार्ट और तेज है।

एडीसीपी सरवणन टी., एसीपी अतुल अंजान त्रिपाठी और एसओजी प्रभारी गौरव कुमार सिंह के टीमवर्क और समर्पण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि काशी की पुलिस किसी चुनौती से पीछे नहीं हटती

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