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नियमों की अर्थी और जिला प्रशासन सहित पर्यटन विभाग की साख को सरेआम मुँह चिढ़ाता अयोध्या महोत्सव

  • रिपोर्ट: अमित कुमार

अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या को विश्वस्तरीय और पॉलिथीन मुक्त बनाने का सरकारी संकल्प ‘अयोध्या महोत्सव’ की दहलीज पर आकर दम तोड़ता नजर आ रहा है। महोत्सव की चकाचौंध के पीछे छिपी अव्यवस्थाओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दोपहर साढ़े तीन से चार बजे के बीच जब महोत्सव में सबसे कम भीड़ होती है भू-स्थानिक साक्ष्यों के साथ की गई इस विशेष कवरेज में जो भयावह तस्वीर सामने आई है वह डराने वाली है।

सवाल यह उठता है कि यदि न्यूनतम भीड़ के समय यह हाल है, तो सायंकाल उमड़ने वाले जनसैलाब के समय सुरक्षा और स्वच्छता का क्या स्तर होगा प्रशासनिक मानकों के अनुसार किसी भी बड़े आयोजन के लिए पुलिस अधिनियम, अठारह सौ इकसठ की धारा तीस के तहत अनुमति और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है, लेकिन यहाँ इन नियमों का सरेआम उल्लंघन दिख रहा है। महोत्सव परिसर में लोहे के खंभों के सहारे नंगे बिजली के तारों को दौड़ाया गया है, जो कि विद्युत विभाग के सुरक्षा मानकों और अनापत्ति प्रमाण पत्र के नियमों के विरुद्ध है। कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण इन लोहे के खंभों में कभी भी विद्युत प्रवाह उतर सकता है जो किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

सुरक्षा के लिहाज से आयोजन स्थल पर न तो रोगी वाहन तैनात दिखा और न ही अग्नि शमन विभाग के मानकों के अनुरूप पुख्ता इंतजाम नजर आए। स्वच्छता अभियान की हकीकत तो और भी चिंताजनक है; नगर निगम द्वारा स्थापित शौचालय कक्ष गंदगी से इस कदर पटे पड़े हैं कि उनमें कीड़े रेंग रहे हैं। सफाई व्यवस्था की पोल तब और खुल गई जब वहां नगर निगम की पानी की टंकी तो खड़ी मिली लेकिन वह पूरी तरह खाली थी, उसमें पानी का नामोनिशान तक नहीं था। पानी के अभाव में शौचालय नरक बन चुके हैं और भयंकर दुर्गंध के कारण लोग इनका उपयोग करने के बजाय बाहर ही शौच करने को मजबूर हैं। मौके पर मौजूद एक नागरिक ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि “स्वच्छता का संदेश देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं को असलियत देखनी है तो यहाँ आएं जहाँ जनता की भारी भीड़ जुट रही है, यहाँ सफाई सुनिश्चित कर प्रधानमंत्री जी के सपनों को साकार करना चाहिए न कि सिर्फ कैमरों के सामने चित्र खिंचवाने चाहिए।”

एक तरफ प्रशासन छोटे दुकानदारों पर प्लास्टिक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और छापेमारी करता है, वहीं महोत्सव परिसर में धड़ल्ले से पन्नी का उपयोग मानकों की धज्जियां उड़ा रहा है। ध्वनि प्रदूषण नियम दो हजार के तहत लाउडस्पीकर के उपयोग की जो सीमाएं निर्धारित हैं, उन्हें भी यहाँ दरकिनार कर दिया गया है। चलचित्र और साक्ष्यों के साथ तैयार यह रिपोर्ट बताती है कि यह महोत्सव सुरक्षा और स्वच्छता के लिहाज से एक बड़े खतरे की तरह खड़ा है। अयोध्या की जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या कोई बड़ा हादसा होने पर आयोजन समिति पर्यटन विभाग या जिला प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा? इन तमाम अव्यवस्थाओं को लेकर अब मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र प्रेषित कर उन लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी जिन्होंने पवित्र अयोध्या की छवि के साथ खिलवाड़ किया है। जनहित में सत्य को सामने लाना ही हमारा मुख्य धर्म है।

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