
देहरादून/मनोरंजन डेस्क: मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद को लेकर फिर चर्चा में हैं। उनके भाई और गायक मीका सिंह ने दावा किया है कि मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा मंच पर रोके जाने और शराब पीकर प्रस्तुति देने का आरोप लगाए जाने के बाद दलेर मेहंदी भावनात्मक रूप से काफी आहत हुए थे। मीका के मुताबिक, घटना के बाद फोन पर बातचीत के दौरान उनके भाई रोने लगे थे।
मीका सिंह ने यह भी दावा किया कि विवाद के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों भाइयों से फोन पर बात की और घटना को लेकर माफी मांगी थी।
विवाद के बाद मीका सिंह से हुई थी बात
मीका सिंह ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सूरत में अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें दलेर मेहंदी से जुड़े विवाद की जानकारी मिली। उन्होंने उसी रात अपने भाई से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।
मीका के अनुसार, अगले दिन जब दोनों भाइयों की फोन पर बात हुई तो दलेर मेहंदी भावुक हो गए और रोने लगे। मीका ने बताया कि उन्होंने अपने भाई को सलाह दी कि यदि उनकी तबीयत ठीक नहीं है, तो उन्हें कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने से बचना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मंच पर उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ था, तो उन्हें उसी समय अपनी बात स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फोन कर माफी मांगी: मीका
मीका सिंह के मुताबिक, विवाद के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों भाइयों से फोन पर बातचीत की थी। मीका का दावा है कि मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड में उनका हमेशा स्वागत किया जाएगा और मंत्री की ओर से भी माफी मांगी गई।
हालांकि, मुख्यमंत्री की बातचीत और माफी को लेकर मीका सिंह के इस बयान की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने पर उसे खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
क्या था पूरा विवाद?
उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री सुबोध उनियाल के मंच पर पहुंचने और दलेर मेहंदी को प्रस्तुति देने से रोकने का वीडियो सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ था। कार्यक्रम से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हुई।
मीका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए दावा किया था कि दलेर मेहंदी ने कभी शराब नहीं पी है। इस मामले में मंच पर हुई घटना, मंत्री की टिप्पणी और मुख्यमंत्री की कथित माफी से जुड़े दावों को संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के आधार पर देखा जाना जरूरी है।




