
New Delhi.अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर आरक्षण से जुड़े अहम मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने केंद्र की स्पष्टीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने पूर्व फैसले के अमल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को 17 सितंबर 2026 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक की मांग ठुकराई
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आर. महादेवन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की उस मांग पर सुनवाई की, जिसमें 11 मार्च को दिए गए फैसले पर स्पष्टीकरण और उसके क्रियान्वयन पर रोक की मांग की गई थी।
शीर्ष अदालत के उस फैसले में कहा गया था कि OBC क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता की आय या वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए आय के साथ-साथ पद, सामाजिक स्थिति और नौकरी की श्रेणी जैसे अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखने की बात कही गई थी।
फैसले के अनुसार, PSU, बैंक और निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों को केवल अधिक वेतन होने के आधार पर OBC आरक्षण से बाहर नहीं किया जा सकता।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का मुद्दा भी उठा
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि फैसले के लागू होने से कई प्रक्रियाओं पर व्यावहारिक असर पड़ सकता है। उन्होंने दलील दी कि UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के 958 अनुशंसित उम्मीदवारों के सर्विस एलोकेशन की प्रक्रिया पुराने नियमों के आधार पर अंतिम चरण में थी।
सरकार का कहना था कि यदि 11 मार्च के फैसले को पिछली तारीख से लागू किया जाता है, तो मेरिट सूची, IAS और IPS कैडर आवंटन के साथ-साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रभावित हो सकते हैं।
18 राज्यों की भर्तियों और दाखिलों पर असर का दावा
केंद्र ने यह भी अदालत के समक्ष चिंता जताई कि फैसले का प्रभाव केंद्र सरकार की सेवाओं के अलावा 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही भर्तियों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों की प्रवेश प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों के बावजूद फिलहाल अपने पूर्व आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अब सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को होगी।




