
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
रक्षाबंधन 2026: सावन का महीना पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जाता है। सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करती है, जबकि भाई जीवनभर बहन की रक्षा का वचन देता है।
इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हालांकि, इस बार रक्षाबंधन के दिन ही साल का आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ऐसे में राखी बांधने के मुहूर्त और ग्रहण को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं।
सुबह इतने समय तक रहेगा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। ऐसे में राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है।
इसलिए भाई-बहन को राखी के लिए पहले से तैयारी कर लेने की सलाह दी जाती है, ताकि शुभ समय में विधि-विधान से पर्व मनाया जा सके।
राखी बांधने से पहले ऐसे करें तैयारी
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा की थाली तैयार करें। थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले भगवान गणेश और लड्डू गोपाल को राखी अर्पित की जाती है। इसके बाद भाई को रोली और अक्षत से तिलक लगाकर उसकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। फिर भाई की आरती कर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
मान्यता है कि राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।
रक्षाबंधन के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण
28 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण सुबह 6:55 बजे शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा।
इसी वजह से रक्षाबंधन के दिन ग्रहण और सूतक काल को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है।
भारत में नहीं दिखाई देगा चंद्र ग्रहण
बताया जा रहा है कि ग्रहण के दौरान भारत में दिन का समय रहेगा, इसलिए यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसे अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों समेत दुनिया के कई क्षेत्रों में देखा जा सकेगा।
भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्यों को लेकर कुछ परंपराओं में प्रतिबंध माना जाता है।
हालांकि, मान्यता यह भी है कि सूतक काल उसी स्थान पर मान्य होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा।
क्या ग्रहण की वजह से रक्षाबंधन पर पड़ेगा असर?
धार्मिक मान्यताओं के आधार पर भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण रक्षाबंधन के पर्व पर इसका प्रभाव नहीं माना जा रहा है। ऐसे में बहनें शुभ मुहूर्त में भाई की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मना सकती हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारियां सामाजिक एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि के लिए संबंधित पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है।





