
New Delhi: रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पावन पर्व है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर शुभ मुहूर्त के साथ भद्रा काल की भी चर्चा होती है। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है।
क्या होती है भद्रा?
हिंदू पंचांग में भद्रा को विष्टि करण कहा जाता है। करण पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में से एक है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भद्रा को उग्र स्वभाव वाली माना गया है। इसी वजह से भद्रा के पृथ्वी लोक में प्रभावी रहने के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा रही है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भद्रा को सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन माना जाता है। मान्यता है कि उनका स्वभाव उग्र था और उनके जन्म के बाद शुभ कार्यों में बाधाएं आने लगीं। इसके बाद ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के एक करण के रूप में स्थान दिया। तभी से भद्रा काल को कुछ शुभ कार्यों के लिए अनुपयुक्त मानने की परंपरा चली आ रही है।
भद्रा में क्यों नहीं बांधते राखी?
रक्षाबंधन को स्वयं एक मंगल पर्व माना जाता है। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु की कामना करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ कार्य को भद्रा काल में करने से बचना चाहिए।
मान्यता है कि भद्रा के दौरान किए गए मांगलिक कार्यों का शुभ फल प्रभावित हो सकता है। इसलिए रक्षाबंधन पर राखी बांधने का समय तय करते समय पूर्णिमा तिथि के साथ भद्रा की स्थिति भी देखी जाती है। यदि पूर्णिमा के दौरान भद्रा हो तो उसके समाप्त होने के बाद राखी बांधने का मुहूर्त निर्धारित करने की परंपरा है।
रावण से भी जुड़ी है भद्रा की लोककथा
भद्रा को लेकर रावण और उसकी बहन से जुड़ी एक लोकप्रिय लोककथा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में अपने भाई को राखी बांधी थी। इसके बाद रावण का अंत हुआ और उसका साम्राज्य नष्ट हो गया।
इसी लोकमान्यता के आधार पर भद्रा काल में भाई को राखी बांधने से बचने की बात कही जाती है। हालांकि, यह कथा धार्मिक और लोकपरंपरा का हिस्सा है, इसे ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
2026 में रक्षाबंधन पर रहेगी भद्रा?
वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी।
पंचांग की गणना के अनुसार इस बार भद्रा का प्रभाव रक्षाबंधन के मुख्य समय में बाधा नहीं बनेगा, क्योंकि भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, राखी बांधने का सटीक समय स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।
भद्रा काल में किन कार्यों से बचते हैं?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में भद्रा को विशेष रूप से मांगलिक कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। इसलिए इस दौरान आमतौर पर विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ संस्कारों को टालने की परंपरा है।
हालांकि, भद्रा को हर प्रकार के कार्य के लिए समान रूप से अशुभ मानना उचित नहीं है। पंचांग और मुहूर्त परंपरा में अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग नियम बताए गए हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक तथ्य या चिकित्सकीय/कानूनी सलाह न माना जाए। शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह लें।




