
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
धर्म: दुनिया के प्राचीनतम शहरों में गिने जाने वाले कांचीपुरम अपनी समृद्ध संस्कृति और गहरी आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यहां करीब 125 बड़े मंदिर मौजूद हैं, जिनका अपना-अपना इतिहास है। इन्हीं में से एक है वरदराजा पेरुमल मंदिर, जिसकी लोकप्रियता पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है।
भगवान विष्णु का दिव्य स्वरूप
यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां भगवान भगवान विष्णु वरदराजा पेरुमल के रूप में अपनी पत्नी पेरुंदेवी थायर के साथ विराजमान हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना राजा कृष्ण वर्मा के शासनकाल में हुई थी। कहा जाता है कि उन्होंने थामिरबरानी नदी में स्नान के दौरान एक पवित्र नीले पत्थर की मूर्ति प्राप्त की थी।
युद्ध में मिली थी दैवीय सहायता
कथाओं के अनुसार, जब राजा के राज्य पर आक्रमण हुआ, तो उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। मान्यता है कि दैवीय शक्तियों ने उनकी मदद की और शत्रुओं को परास्त कर दिया। इसके बाद भगवान की कृपा से प्रसन्न होकर राजा ने इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया।
सोने-चांदी की छिपकलियों की अनोखी मान्यता
मंदिर की एक खास पहचान इसके गर्भगृह में मौजूद सोने और चांदी की छिपकलियां हैं। स्थानीय मान्यता है कि इनके दर्शन करने से धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
कहा जाता है कि ये छिपकलियां महर्षि गौतम के शिष्य हैं, जो श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहां आए थे।
जल में सुरक्षित रहती है भगवान की प्रतिमा
मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा भगवान विष्णु की लकड़ी से बनी प्रतिमा से जुड़ी है, जिसे अंजीर के पेड़ की लकड़ी से तैयार किया गया है। यह प्रतिमा लंबे समय तक पानी में सुरक्षित रहती है और इसमें किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता।
प्रतिमा को अंतिम बार 28 जून 2019 को आनंद सरस सरोवर से बाहर निकाला गया था। अब इसे वर्ष 2059 में पुनः निकाला जाएगा।
बिना किसी विशेष सुरक्षा के पानी में रखे जाने के बावजूद प्रतिमा में न तो सूजन आती है और न ही उसमें कोई क्षति होती है। यही वजह है कि भक्तों की आस्था वरदराजा पेरुमल के प्रति और भी गहरी होती जा रही है।




