
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच हुए संघर्ष-विराम को लेकर अब स्थिति और स्पष्ट होती नजर आ रही है। जे. डी. वेंस ने साफ कहा है कि इस पूरी वार्ता में लेबनान को शामिल किए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
हंगरी से रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में वेंस ने उन अटकलों को खारिज कर दिया, जिनमें शांति प्रस्ताव में लेबनान को शामिल किए जाने की बात कही जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने कभी भी ऐसा कोई संकेत या वादा नहीं किया।
ईरान और सहयोगी देशों पर ही रहा फोकस
वेंस के मुताबिक, इस संघर्ष-विराम का मुख्य उद्देश्य केवल ईरान और अमेरिका के सहयोगी देशों—जैसे बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला इजरायल और खाड़ी के अरब राष्ट्र—तक सीमित था। उन्होंने दोहराया कि इस प्रक्रिया में लेबनान को शामिल करने की बात कभी नहीं कही गई।
पाकिस्तान के दावे पर उठे सवाल
वेंस के बयान के बाद शहबाज शरीफ के उस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें उन्होंने लेबनान को भी शांति समझौते का हिस्सा बताया था। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू भी ऐसे दावों को खारिज कर चुके हैं।
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ रिपोर्ट से खुलासा
अंतरराष्ट्रीय अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ही पाकिस्तान को ईरान के साथ अस्थायी संघर्ष-विराम प्रक्रिया में आगे बढ़ाया था। इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान की भूमिका स्वतंत्र मध्यस्थ के बजाय अमेरिकी रणनीति के तहत थी।
कूटनीतिक दावों पर बढ़ी बहस
ताजा घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान के कूटनीतिक दावों पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता और स्थिति पर असर पड़ सकता है।





