- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। थाना लोहता क्षेत्र में कृष्ण मोहन सिंह निवासी मिसिरपूरा लहरतारा के संयुक्त बैंक खाते से 33 लाख 95 हजार रुपये निकाले जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उसकी जानकारी और सहमति के बिना खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी गई। मामले में बैंक प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। पीड़ित ने थाने में लिखित शिकायत देकर धनराशि वापस दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित का अपनी माता जी स्व कृष्णावती देवी के साथ एसबीआई में संयुक्त खाता (MOP: Either or Survivor) था।
आरोप है कि उक्त खाते में ‘आटो‘स्वीप’ की भी सुविधा थी और साथ ही पिडित ने 17 जनवरी को खाता लाक करा दिया था जिसके बावजूद बैक प्रबंधन ने 28 जनवरी 2026 को 33.95 लाख रुपये नामनी कन्हैया सिंह के खाते में गलत तरीके से ट्रांसफर कर दिए गए। पीड़ित का कहना है कि इस निकासी के लिए उसने किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी और न ही बैंक की ओर से उसे कोई पूर्व सूचना दी गई।
बताया जा रहा है कि 7 जनवरी 2026 को पीड़ित ने एसबीआई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद 20 जनवरी और 21 जनवरी को भी क्रमशः दो अन्य शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित का आरोप है कि बैंक की लापरवाही और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण यह घटना संभव हुई।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि संयुक्त खाते में किसी एक खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में ही दुसरे संयुक्त खाता धारक को अधिकार मिलता है, जबकि इस मामले में ऐसा कोई तथ्य नहीं था। इसके बावजूद खाते से पूरी धनराशि निकाले जाने को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।वहीं पिडित ने लोहता थाना पुलिस के कार्यप्रणाली पर भी गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोहता थाने की पुलिस ने उचित कार्यवाही न करते हुए पूरे मामले में लिपापोती की है। पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि उसकी जीवनभर की जमा पूंजी को सुरक्षित वापस दिलाया जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों में भी चर्चा का माहौल है और बैंकिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और पीड़ित को कब तक राहत मिलती है।





