
- रिपोर्ट: आलम अंसारी
हापुड़। ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’—इस पंक्ति को हापुड़ के मोहल्ला कोटला सादात के निवासियों ने सच कर दिखाया है। यहाँ के मुस्लिम समुदाय ने आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी पूरे इलाके में सराहना हो रही है। मोहल्ले में रहने वाले हिंदू भाई ‘अर्जुन’ की मृत्यु के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने न केवल उनकी अर्थी को कंधा दिया, बल्कि पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार भी कराया।
मूल रूप से हापुड़ देहात क्षेत्र के रहने वाले अर्जुन (करीब 50 वर्ष) पिछले 15 सालों से कोटला सादात में रह रहे थे। बीते दिनों एक दुखद हादसे में ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। अर्जुन के परिवार की आर्थिक स्थिति और अकेलेपन को देखते हुए मुस्लिम समाज ने मानवता का धर्म निभाने का फैसला किया।
खुद बनाई अर्थी, चंदा जुटाकर किया अंतिम संस्कार
अर्जुन के निधन के बाद मोहल्ले के सैकड़ों मुस्लिम भाई उनके घर एकत्र हुए। उन्होंने पुलिस को सूचना देने के साथ-साथ अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाई।
बाजार से खरीदा सामान: समुदाय के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और बाजार से कफन, लकड़ी व अन्य पूजन सामग्री खरीदी।
कंधों पर अर्थी: नसीम अहमद और अन्य साथियों ने अपने हाथों से अर्थी तैयार की और ‘राम नाम सत्य है’ के उद्घोष के बीच कंधा देकर मोक्षधाम (शमशान घाट) तक पहुँचाया।
हिंदू रीति-रिवाज: शमशान घाट पर पूरे हिंदू रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार अर्जुन का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
इस नेक कार्य की अगुवाई करने वाले स्थानीय निवासी नसीम अहमद ने भावुक होते हुए कहा:
”अर्जुन भैया हमारे बीच पिछले 15 वर्षों से रह रहे थे। वे हमारे परिवार का हिस्सा थे। दुख की इस घड़ी में हम हिंदू-मुस्लिम नहीं, सिर्फ इंसान हैं। हम चाहते हैं कि हमारे देश में ऐसा भाईचारा बना रहे जो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बने।”
इलाके में हो रही चहुंओर प्रशंसा
आज के दौर में जब छोटी-छोटी बातों पर दूरियां बढ़ जाती हैं, ऐसे में हापुड़ की यह तस्वीर समाज को जोड़ने का काम कर रही है। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने कोटला सादात के लोगों के इस कदम की खुले दिल से प्रशंसा की है। यह घटना साबित करती है कि इंसानियत आज भी हर मजहब से ऊपर है





