
- रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव
लखनऊ। विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण के माध्यम से उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की विस्तृत और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। ऊर्जा, कृषि, पशुपालन, पर्यावरण, खनन, परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, आवास, श्रमिक कल्याण, शिक्षा और वित्तीय सुदृढ़ता जैसे क्षेत्रों में सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को उन्होंने क्रमबद्ध ढंग से सदन के सामने रखा।
राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव आया है। वर्तमान में नगरीय क्षेत्रों में 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों में 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 19 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के तहत लाखों स्मार्ट और प्री-पेड मीटर लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले नौ वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है।
कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था—तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ा है। खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि के साथ कृषि जीएसडीपी में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। बागवानी क्षेत्र में खेती का दायरा और उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में बड़ा इजाफा हुआ है और निर्यात में भी कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के संदर्भ में राज्यपाल ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से किसानों को रिकॉर्ड भुगतान किया गया है। नई चीनी मिलों की स्थापना, गन्ना मूल्य में वृद्धि और उत्पादकता में सुधार से न केवल किसानों को लाभ मिला है, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
पशुपालन और गो-कल्याण को लेकर राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में इसे संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। गो-आश्रय स्थलों, डीबीटी के माध्यम से सहायता और सहभागिता योजनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राज्यपाल ने बताया कि बड़े पैमाने पर पौधरोपण के चलते प्रदेश का वनावरण बढ़ा है। जनभागीदारी से जुड़े इन प्रयासों ने सतत विकास की दिशा में उत्तर प्रदेश को एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
खनन क्षेत्र में पारदर्शी नीतियों और तकनीक आधारित निगरानी से राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने करोड़ों यात्रियों को सेवाएं प्रदान करते हुए राजस्व में भी मजबूती हासिल की है।
सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, लक्षित सब्सिडी, आरक्षण सुधार और ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से लाखों लोगों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं के तहत लाखों गरीब परिवारों को पक्के मकान मिले हैं।
शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने नई शिक्षक नियुक्तियों, स्मार्ट कक्षाओं, आईसीटी लैब, नए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना को शैक्षणिक ढांचे को सशक्त करने वाला बताया। आकांक्षात्मक जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे क्षेत्रों में हुए सुधारों को उन्होंने समावेशी विकास का उदाहरण बताया।
अंत में राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक सुधारों, वित्तीय सुदृढ़ता और जनभागीदारी के बल पर उत्तर प्रदेश अब देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि “विकसित भारत” की परिकल्पना के अनुरूप उत्तर प्रदेश आने वाले समय में समावेशी, संतुलित और टिकाऊ विकास का प्रेरक मॉडल बनेगा।





