
- रिपोर्ट- ज्ञानेश वर्मा
प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों एवं अन्य शैक्षणिक-गैरशैक्षणिक कार्मिकों को अब कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। इस सुविधा के अंतर्गत बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों तथा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त (अनुदानित एवं स्ववित्त पोषित) विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक (CWSN), अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कार्यरत वार्डेन, पूर्णकालिक एवं अंशकालिक शिक्षक/शिक्षिकाएं तथा प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइया एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्य शामिल होंगे।
बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत कार्मिकों द्वारा लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि उन्हें सरकारी चिकित्सालयों के साथ-साथ नजदीकी निजी चिकित्सालयों में भी उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसी के दृष्टिगत माननीय मुख्यमंत्री द्वारा 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने की घोषणा की गई थी। अब इस घोषणा के क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
इस योजना के अंतर्गत पात्र कार्मिकों एवं उनके आश्रितों को सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी चिकित्सालयों में भी आई.पी.डी. (अंतरोंगी विभाग) उपचार हेतु कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। योजना के तहत प्रति कार्मिक अनुमानित 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से व्यय भार आंका गया है। कुल 11,95,391 कार्मिकों के सापेक्ष लगभग 358.61 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय भार अनुमानित है।
कैशलेस उपचार सुविधा योजना का क्रियान्वयन State Agency for Comprehensive Health and Integrated Services (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। यह सुविधा राजकीय चिकित्सालयों के साथ-साथ साचीज से संबद्ध निजी चिकित्सालयों में भी उपलब्ध होगी। उपचार की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा समय-समय पर निर्धारित दरों के अनुसार ही लागू होंगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि यह योजना शिक्षकों एवं कार्मिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उन्हें और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित हो सकेगी।





