
- रिपोर्ट: ज्ञानेश वर्मा
लखनऊ। राष्ट्रीय स्तर की पंजीकृत सामाजिक संस्था कुर्मी क्षत्रिय सभा, लखनऊ (पंजीकरण संख्या 771/1984) ने प्रस्तावित यूजीसी इक्विटी एक्ट 2026 का खुलकर समर्थन किया है। संस्था ने इसे उच्च शिक्षा संस्थानों में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करने तथा दलितों, ओबीसी, महिलाओं और दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक आवश्यक और स्वागतयोग्य कदम बताया है।
कुर्मी क्षत्रिय सभा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अधिनियम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता और समावेशन को बढ़ावा देगा। प्रस्तावित कानून के तहत एक स्वतंत्र समिति के गठन का प्रावधान है, जिसमें ओबीसी, अनुसूचित जाति, महिलाओं और दिव्यांगजनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति शिकायत मिलने पर जांच करेगी और भेदभाव या अवसरों के अतिक्रमण की पुष्टि होने पर एससी/एसटी एक्ट और संबंधित ओबीसी कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर सकेगी।
विज्ञप्ति में बताया गया कि इस कानून के अंतर्गत संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति और कॉलेज के प्राचार्य की जवाबदेही भी तय की जाएगी। गंभीर उल्लंघन की स्थिति में यूजीसी द्वारा फंड रोकने या डिग्री प्रदान करने पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकेंगे।
संस्था ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम का उद्देश्य धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। खास बात यह है कि इस कानून के उद्देश्यों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस – सामान्य वर्ग) को भी संरक्षण प्रदान किया गया है, इसलिए इसका विरोध पूरी तरह अनुचित है।
कुर्मी क्षत्रिय सभा ने कुछ संगठनों द्वारा समिति में उच्च जातियों के प्रतिनिधित्व को लेकर किए जा रहे विरोध को निराधार और असंवैधानिक बताया। संस्था ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनी विशाखा समिति में केवल महिलाएं होती हैं, उसी तरह किसी विशेष वर्ग की सुरक्षा के लिए बनी समिति में उसी वर्ग के प्रतिनिधियों का होना पूरी तरह तार्किक और संवैधानिक है। महिला आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अनुसूचित जाति आयोग जैसे संवैधानिक निकाय भी इसी सिद्धांत पर गठित किए गए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि यदि सरकार इस कानून को कमजोर करने या तथाकथित “मिडिल पाथ” निकालने के लिए इसमें संशोधन करती है, तो ओबीसी, अनुसूचित जाति और कुर्मी समाज इसे अपने अधिकारों पर हमला मानेगा और आगामी चुनावों में सरकार के समर्थन पर पुनर्विचार करने को मजबूर होगा।
संस्था की ओर से राज बहादुर सिंह पटेल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं संयोजक, न्याय सहायता समिति, कुर्मी क्षत्रिय सभा, लखनऊ ने स्पष्ट मांग की कि यूजीसी इक्विटी एक्ट 2026 को बिना किसी बदलाव के पूरी सख्ती से लागू किया जाए, ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में वास्तविक सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित हो सके।





