- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश संस्कृत विभाग के सौजन्य से उत्तर प्रदेश दिवस के अंतर्गत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में वंदे मातरम गीत पर आधारित चित्रांकन कार्यशाला का उद्घाटन ललित कला विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रांगण में हुआ। आयोजन के मुख्य अतिथि सुविख्यात चित्रकार एस प्रणाम सिंह तथा वसंता कॉलेज राजघाट के सेवानिवृत प्रोफेसर एवं चित्रकार श्री सत्येंद्र बाऊनी ने दीप प्रज्वलित कर इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
वंदे मातरम गीत में संपूर्ण विश्व के स्वरूप का दृष्टिगोचर होता है। भगवान श्रीराम हों या भगवान बुद्ध हो या संत नानक हो, कबीर हो, तुलसी हो- यह सभी वंदे मातरम गीत में समाहित है। स्त्री शक्तियों में देवी आपला, घोषा, गार्गी सबके विराट स्वरूप को वंदे मातरम गीत प्रदर्शित करता है- उपरोक्त कथन उद्घाटन अवसर पर चित्रकार सत्येंद्र बाऊनी ने अपने उद्बोधन में कहा। कार्यशाला के उद्घाटन पर बीज वक्तव्य राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष माननीय प्रोफेसर सुनील कुमार विश्वकर्मा ने रखा।
एस प्रणाम सिंह ने चित्रकारों के प्रेरणा के लिए कुछ सुझाव व्यक्त किया। कार्यशाला के समन्वयक डॉ0 सुनील कुमार सिंह कुशवाहा ने बताया कि यह कार्यशाला तीन दिवस तक ललित कला विभाग में चलेगी जो वाराणसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगी। वंदे मातरम गीत के प्रत्येक छन्द के ऊपर उत्तर प्रदेश के पांच स्थानों पर चित्रण कार्यशाला आयोजित है जिसमें चतुर्थ छन्द का चित्रण वाराणसी क्षेत्र के कलाकारों को प्राप्त हुआ है।
युवा चित्रकार डॉक्टर शशि कांत नाग के मार्गदर्शन में काशी क्षेत्र के वरिष्ठित चित्रकर्तृ श्रीमती आशा प्रकाश जी, युवा प्रतिभा बलदाऊ वर्मा, रवि शंकर उर्फ अर्जुन, आशीष राय और आजाद कपूर के द्वारा 30 फीट के वृहद फलक पर वंदे मातरम गीतमाला का अंकन किया जा रहा है। सहयोगी कलाकारों में अंकित कुमार, सुरेश कुमार सौरभ, प्रवीण प्रकाश, हिमांशु, आदि शामिल हैं।
इस अवसर पर ललित कला विभाग के अध्यापक डॉ रामराज, डॉक्टर शत्रुघ्न प्रसाद, चित्रकार एवं राणा जी मूवमेंट सभागार के अध्यक्ष राणा शेरु सिंह, डॉ राधाकृष्ण गणेशन तथा अनेक कला विद्यार्थी उपस्थित थे।
उद्घाटन के उपरांत चित्रकारों ने पूरे पाठ पर रेखांकन कार्य संपन्न किया और रेखांकन के द्वारा अपने अन्वेषण आत्मक क्षमता को उद्घाटित किया।


