
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या। बसपा सुप्रीमो बहन मायावती के जन्मदिन पर अयोध्या में जो नज़ारा देखने को मिला, उसने साफ कर दिया कि बहुजन राजनीति एक बार फिर करवट ले चुकी है। मंडल के हर कोने से उमड़ा कार्यकर्ताओं का सैलाब इस बात का ऐलान था कि मैदान सज चुका है और मुकाबला तय है।
इस विशाल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्वनाथ पाल ने मंच से सीधे-सीधे सियासी बिगुल फूंक दिया। उन्होंने दो टूक कहा—
“आज बहन मायावती जी के जन्मदिन पर यहां मौजूद हर कार्यकर्ता और नेता यह कसम खाकर जा रहा है कि 2027 में उत्तर प्रदेश की कुर्सी पर फिर से बहन जी ही बैठेंगी।”
विश्वनाथ पाल ने साफ चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब लड़ाई केवल नारों की नहीं होगी। प्रधान चुनाव से लेकर जिला पंचायत चुनाव तक, बूथ स्तर पर ऐसा संगठन खड़ा किया जाएगा कि विरोधी गिनती भूल जाएंगे। हर कार्यकर्ता अपना पूरा दम-खम झोंक देगा।
कार्यक्रम के दौरान जैसे ही नेताओं ने केक काटकर बहन मायावती का जन्मदिन मनाया, वैसे ही संदेश भी चला गया—
“यह जश्न नहीं, शक्ति का ऐलान है।”
अनुशासित भीड़, गूंजते नारे और जोश से लबरेज़ माहौल ने यह साफ कर दिया कि अयोध्या से उठी यह आवाज़ अब राजनीतिक गलियारों में हलचल नहीं, खलबली मचा रही है।
नारे गूंजे—
“2027—बहन जी फिर से!”
“सत्ता नहीं, सम्मान चाहिए!”
साफ है—बहुजन समाज पार्टी अब केवल तैयारी में नहीं, सीधे सत्ता की पटकथा लिखने के मूड में है।





