
- रिपोर्ट: सुरेश त्रिपाठी
बलरामपुर: विकास के दावों और सरकारी योजनाओं की चमक-दमक के बीच एक ऐसा गांव भी है, जहां तरक्की केवल फाइलों और भुगतान रजिस्टरों तक ही सीमित रह गई है। जी हा हम बात करते है विकास खंड हरैया सतघरवा के ग्राम पंचायत कमदा का जहां काग़ज़ों में सड़कें चमचमाती हैं, नालियां बनी हुई दिखती हैं, पंचायत भवन सुसज्जित बताया गया है, लेकिन ज़मीनी तस्वीर इससे बिल्कुल उलट है। गांव की गलियां आज भी कीचड़ और गड्ढों से भरी हैं, बरसात में हालात और बदतर है।
जबकि ग्राम पंचायत के अभिलेखों में विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च होने का उल्लेख है। कहीं सीसी रोड, कहीं इंटरलॉकिंग, तो कहीं नाली निर्माण के नाम पर पूरा भुगतान दिखाया गया है। मगर जब मौके पर जाकर देखा गया, तो कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरे हैं या फिर उनका नामोनिशान तक नहीं है। जो काम हुए भी हैं, वे मानक विहीन और बेहद घटिया गुणवत्ता के बताए जा रहे हैं, जिससे कुछ ही दिन में तस्वीर बदहाल दिखी जहां सड़को पर नालियों का गंदा पानी भरा रहता है ।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्य बिना पारदर्शिता के कराए गए। न तो ग्राम सभा में सही तरीके से प्रस्ताव रखे गए और न ही ग्रामीणों की सहमति ली गई।

इस पूरे मामले में प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय-समय पर भौतिक सत्यापन होता, तो काग़ज़ों और ज़मीन के बीच का यह बड़ा अंतर सामने आ ही नहीं पाता। अब ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है, ताकि विकास काग़ज़ों से निकलकर ज़मीन पर दिखाई दे।
इस विषय को लेकर जब विकासखंड अधिकारी हसैया को फोन किया जाता है तो उनका फोन नहीं उठाता है जिससे प्रशासनिक पक्ष नहीं मिला





