
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: शिक्षा विभाग के एक बड़े अधिकारी की कानूनी लापरवाही और मनमानी अब अदालत के कठघरे में आ चुकी है। मुख्य दंडाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी सुबोध पाठक पर ₹500 का जुर्माना लगाया है, जो कोर्ट के आदेशों की बार-बार अवमानना और अपना पक्ष न रखने का सीधा नतीजा है।
जब सुबोध पाठक मुरसान में तैनात थे, तब उन्होंने शिक्षक सिद्धार्थ कुमार के खिलाफ एक एप्लीकेशन पर विजय सोनी के नाम से हस्ताक्षर कर दिए। यही नहीं, इस कथित फर्जीवाड़े को लेकर शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ता चला गया।
कोर्ट को बार-बार गुमराह करने का आरोप कोर्ट सूत्रों के मुताबिक, सुबोध पाठक को कई बार कोर्ट में तलब किया गया,लेकिन हर बार वे नए-नए बहाने बनाकर हाज़िर होने से बचते रहे, न कोई जवाब, न कोई पक्ष, सिर्फ़ टालमटोल। इस रवैये से नाराज़ होकर कोर्ट ने छोटी लेकिन कड़ी कार्रवाई करते हुए ₹500 का जुर्माना लगा दिया।
कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर आगे भी आदेशों की अवहेलना हुई या कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब नहीं दिया गया,
तो खंड शिक्षा अधिकारी सुबोध पाठक पर बड़ी और कठोर कार्रवाई हो सकती है।
एक तरफ शिक्षा विभाग की साख पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ यह मामला अब“फर्जी हस्ताक्षर – कोर्ट अवमानना – अफसर की मनमानी”के रूप में चर्चा का केंद्र बन चुका है।
क्या एक अधिकारी शिक्षक के खिलाफ दूसरों के नाम से आवेदन पर हस्ताक्षर कर सकता है?
क्या कोर्ट की बार-बार अनदेखी करना कानून का मज़ाक उड़ाना नहीं?


