
- रिपोर्ट: ज्ञानेश वर्मा / यूपी हेड
लखनऊ: महिलाओं को नौकरी के साथ-साथ घर बच्चों को देखना बीएलओ की ड्यूटी करना पुरुषों के मुताबिक कितना सही है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील सवाल है। महिलाएं बीएलओ की ड्यूटी, नौकरी और घर-बच्चों की देखभाल को पुरुषों की तुलना में अधिक जटिल और तनावपूर्ण परिस्थितियों में करती हैं।
पुरुषों के मुकाबले, यह उनके लिए अक्सर बहुत अधिक कार्यभार (Triple Burden) बन जाता है। इसे समझने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करना आवश्यक है।पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर अतिरिक्त बोझ चुनौती का क्षेत्र महिलाओं के लिए स्थिति पुरुषों के लिए स्थिति और पारंपरिक जिम्मेदारी। घर और बच्चों की प्राथमिक जिम्मेदारी (खाना बनाना, सफाई, बच्चों का होमवर्क) ज्यादातर महिलाओं की ही मानी जाती है। पुरुषों के लिए, घर की जिम्मेदारी आमतौर पर द्वितीयक या सहायक होती है।
बीएलओ ड्यूटी का समय बीएलओ ड्यूटी (घर-घर सर्वे) अक्सर ड्यूटी के बाद या छुट्टियों में करनी होती है, जो उनके पारिवारिक समय (Family Time) से सीधा टकराती है। पुरुष भी इसी समय काम करते हैं, लेकिन उन्हें घर का काम करने का अतिरिक्त दबाव कम होता है।
थकावट और तनाव महिलाएँ नौकरी, घर के काम और बीएलओ ड्यूटी के बीच संतुलन बनाते हुए शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक थक जाती हैं, जिससे तनाव और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ सकती हैं। पुरुष केवल नौकरी और बीएलओ ड्यूटी पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

महिलाओं की सुरक्षा और आवागमन
आपको बता दे कि खासकर ग्रामीण या अकेले क्षेत्रों में, शाम के समय घर-घर सर्वे करते समय महिला बीएलओ की सुरक्षा एक अतिरिक्त चिंता का विषय होती है। पुरुषों के लिए सुरक्षा की चिंता कम होती है, जिससे वे देर तक भी काम कर पाते हैं। वर्तमान सामाजिक ढांचे में यह स्थिति महिलाओं के लिए अन्यायपूर्ण है, लेकिन इसे बेहतर बनाया जा सकता है। पारिवारिक सहयोग से सबसे जरूरी है कि परिवार (पति और अन्य सदस्य) घर के कामों और बच्चों की देखभाल में पूरी जिम्मेदारी लें ताकि महिला को ड्यूटी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। जब महिला बीएलओ ड्यूटी पर हो, तब घर का काम उसका ‘अकेला काम’ नहीं होना चाहिए।
महिला बीएलओ को सुरक्षित आवागमन के साधन या साथ में एक महिला पुलिसकर्मी/सहायक प्रदान करना। उन्हें फ्लेक्सिबल काम के घंटे (Flexible Working Hours) देना, ताकि वे अपने घर के काम के साथ ड्यूटी को मिला सकें। हालाकि सुप्रीम कोर्ट ने भी बीएलओ पर काम का बोझ कम करने के निर्देश दिए हैं, जिसका लाभ महिला कर्मचारियों को मिलना चाहिए।
समुदाय की समझ समुदाय को यह समझना चाहिए कि बीएलओ का काम राष्ट्रीय महत्व का है, और महिला बीएलओ को सहयोग करना चाहिए, न कि उन्हें परेशान करना। महिलाओं को नौकरी, घर, बच्चे और बीएलओ की ड्यूटी एक साथ करना पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि समाज उनसे घर के काम की अपेक्षा ज्यादा रखता है। यह तभी सही हो सकता है जब उन्हें परिवार, विभाग और समाज से उचित सहयोग मिले और उनके कार्यभार को कम किया जाए।





