
- जन जन की आवाज पंकज झा की कलम से ✍🏻
वाराणसी। शहर में सेक्स रैकेट का फैलता जाल कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में सिगरा क्षेत्र के इंग्लिशिया लाइन में वेश्यावृत्ति से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने छापेमारी कर कार्रवाई की, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह महज़ औपचारिकता भर थी, जबकि गेस्ट हाउस, होटल और फ्लैटों में अवैध गतिविधियाँ बदस्तूर जारी हैं। सूत्रों की मानें तो सिगरा के सोनिया क्षेत्र में ही दर्जनों सेक्स रैकेट का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। सेक्स रैकेट चलाने वाले गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करते हैं। गरीबी, बेरोजगारी, लालच, धोखे और झूठे वादों के सहारे महिलाओं, युवतियों और कई बार नाबालिग बच्चियों को अपने जाल में फँसाया जाता है।
कई मामलों में पीड़ितों को ब्लैकमेल कर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। होटल, गेस्ट हाउस, स्पा और मसाज सेंटरों की आड़ में यह नेटवर्क फैलता जा रहा है। सोशल मीडिया, फर्जी प्रोफाइल और ऐप्स के माध्यम से ग्राहक बनाए जाते हैं।गिरोहों को बचाने में स्थानीय स्तर पर कुछ राजनीतिक तत्वों, दलालों, माफिया गिरोहों या भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ की चर्चा भी आम है।
ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि की युवतियाँ, शहर में नौकरी या मॉडलिंग के सपने लेकर आई महिलाएँ और तस्करी कर लाई गई नाबालिग बच्चियाँ इस अवैध धंधे की सबसे बड़ी शिकार होती हैं। हालाँकि इमोरल ट्रैफिकिंग प्रिवेंशन एक्ट (ITPA), भारतीय दंड संहिता और POCSO कानून ऐसे मामलों में सख्त सज़ा का प्रावधान करते हैं, पर वास्तविकता यह है कि बड़े गिरोह और सरगना अक्सर कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं। कई बार पुलिस की ढिलाई, भ्रष्टाचार या राजनीतिक दबाव के चलते जांच कमजोर पड़ जाती है और कार्रवाई अधूरी रह जाती है।
सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग ने भी इस अवैध धंधे को नए साधन प्रदान कर दिए हैं। जब तक इसके मूल कारणों—भ्रष्टाचार,
राजनीतिक संरक्षण, समाज की चुप्पी और प्रशासनिक उदासीनता—पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस संगठित अपराध को जड़ से समाप्त करना मुश्किल है।
जानकारों का कहना है कि संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्टिंग, समाज की जागरूकता, पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही, कड़े कानूनों का प्रभावी अनुपालन और पीड़ितों के पुनर्वास को प्राथमिकता देकर ही इस अपराध को रोका जा सकता है। सेक्स रैकेट केवल गैरकानूनी गतिविधि नहीं, बल्कि मानवता पर गहरा कलंक है, जिसे मिटाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।


