
- रिपोर्ट :राजीव आनन्द
लखनऊ।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की जन्म की 150वीं जयंती के अवसर पर झारखंड के खूंटी जिले स्थित उनकी जन्मस्थली उलिहातु से “भगवान बिरसा संदेश यात्रा” का शुभारंभ किया गया। रथ पूजन और प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद यात्रा ने पूरे देश में जनजातीय गर्व और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का संदेश फैलाने की शुरुआत की।
यह यात्रा भारत के अनेक जिलों से होती हुई अवध प्रांत में पहुंची, जहाँ रायबरेली, बाराबंकी, लवकुशनगर सहित कई स्थानों पर ज़ोरदार स्वागत किया गया। लखनऊ स्थित बाबासाहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कार्यकर्ताओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इसके बाद यह कारवां लखनऊ विश्वविद्यालय पहुँचा, जहाँ प्रांत मंत्री पुष्पेंद्र बाजपेई और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। भगवान बिरसा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद यात्रा सीतापुर के लिए रवाना हुई।
सेंट जोसेफ कॉलेज, लखनऊ में संगोष्ठी का आयोजन
सीतापुर रोड स्थित सेंट जोसेफ कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राज शरण शाही शामिल हुए। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, अभाविप संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी, कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अनिल अग्रवाल, जोगिंदर सिंह गौतम और यात्रा के प्रांत संयोजक व राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री गोविंद नायक उपस्थित रहे।
देशभर के 24 प्रमुख स्थानों से गुजरेगी संदेश यात्रा
यह यात्रा उलिहातु से प्रारंभ होकर खूंटी, चक्रधरपुर, चाईबासा, रांची, जमशेदपुर, गुमला, लातेहार, दुद्धीनगर, वाराणसी, जौनपुर, रायबरेली, लखनऊ, सीतापुर, बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर सहित 24 प्रमुख स्थानों से होते हुए 27 नवंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित अभाविप के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन में पहुंचेगी।
यात्रा के दौरान नुक्कड़ नाटक, प्रदर्शनी, संगोष्ठी और अनेक जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय गौरव और भगवान बिरसा के संघर्ष को जन–जन तक पहुंचाया जाएगा।
बिरसा मुंडा के योगदान पर वक्ताओं ने रखे विचार
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राज शरण शाही ने कहा कि बिरसा मुंडा, जिन्हें ‘धरती आबा’ कहा जाता है, आदिवासी समुदाय और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान प्रतीक हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरणा स्रोत है।
डॉ. अनिल अग्रवाल ने उनके 1899–1900 के ‘उलगुलान’ आंदोलन को ब्रिटिश शासन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष बताया।
अभाविप अवध प्रांत मंत्री पुष्पेंद्र वाजपेई ने कहा कि यह संदेश यात्रा “भारत के स्वबोध” और जनजातीय समाज के उत्थान का महत्वपूर्ण अभियान है, जो भगवान बिरसा की शिक्षाओं को समाज तक पहुंचाएगी।
यात्रा के देहरादून पहुंचने के साथ ही 27 नवंबर को इसका भव्य समापन होगा।


