
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस नगर क्षेत्र का शिक्षा विभाग इन दिनों किसी टीवी सीरियल से कम नहीं दिख रहा। एक तरफ पुराने अपराधों की राख से उठता पूर्वेन्द्र शर्मा का नया विवाद—और दूसरी तरफ अजीत शर्मा का ऐसा दबदबा कि पूरा विभाग उसकी मेज़ की ओर देख रहा है।
किसके इशारे पर अजीत शर्मा, पूर्वेन्द्र को बचाने का बड़ा खेल खेल रहा है?
अजीत शर्मा—अटैचमेंट पर टिका ‘अजेय बाबू’!


प्रदेश सरकार ने साफ आदेश दिया—
अटैचमेंट खत्म किए जाएं।”
और,हाथरस बीएसए ने सिर्फ एक हफ्ता पहले ही लेटर जारी कर साफ कहा था कि अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारी तुरंत हटें!
लेकिन…
अजीत शर्मा तो अजीत शर्मा है…
न कुर्सी छोड़ रहा, न पोस्ट!
मानो पूरा विभाग उसी की मुट्ठी में हो!


ऑफिस के लोग कहते सुने जा रहे हैं
भइया, अजीत शर्मा की कुर्सी हटाने की कोशिश मत करना
वरना फाइलें खुद चलकर उसकी दराज में पहुंच जाती हैं!”
5 महीने से ‘गायब’ फाइल—और इसमें है असली धमाका!
जांच टीम ने 4 मार्च 2025 के आदेश पर
15 दिन में रिपोर्ट तैयार कर दी
पूर्वेन्द्र शर्मा को दोषी पाया गया
कार्रवाई आगे बढ़नी थी…
लेकिन…
जैसे ही फाइल पटल सहायक अजीत शर्मा के पास पहुंची—
वो फाइल ऐसी गायब हुई जैसे किसी जादूगर ने निगल ली हो।
5 महीने से फाइल उसकी टेबल पर “कैद”
बीएसए तक एक पन्ना भी नहीं पहुँचने दिया
कार्रवाई
हिम्मत
अजीत शर्मा फाइल क्यों रोके बैठा है?
क्या वो पूर्वेन्द्र शर्मा का संरक्षक है?
या किसी बड़े अधिकारी का खास
पूर्वेन्द्र शर्मा—2019 वाला ‘भूत’ फिर जिंदा!
2019 में निलम्बन के बाद लगा था कि मामला खत्म हो गया…
पर पुराने दस्तावेज़ों से फिर खुला पिटारा—
हज पर गई अध्यापिका का वेतन बिना स्वीकृति के जारी,बीईओ के हस्ताक्षर की जगह खुद दस्तखत कराना,नोटिसों की अवहेलना,जांच में दोषी और अब बचाव में लगा एक “पावरफुल बाबू” — अजीत शर्मा
ये तो सीधा सीधा “सिस्टम की जोड़-तोड़” वाला केस बन चुका है।
अजीत शर्मा ने फाइल रोककर सौदेबाज़ी की?”भाई, इतना बड़ा रिस्क सिर्फ फाइल रोकने के लिए कौन लेता है?
ये तो सीधा बचाव अभियान था!”
अगर ये फाइल ऊपर चली जाती, तो खेल खत्म था! इसलिए अजीत शर्मा ने पूरी मशीनरी जाम कर दी!”



