
पटना/समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में स्थित वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र सिर्फ उपजाऊ मिट्टी और समृद्ध खेती के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक इतिहास की अनोखी चालों के लिए भी जाना जाता है। यह क्षेत्र समस्तीपुर लोकसभा सीट के तहत आता है और बीते दशकों में यह क्षेत्रीय दलों का गढ़ बनकर उभरा है।
🔸 राजधानी से 100 KM दूर, लेकिन राजनीति का अपना केंद्र
वारिसनगर समस्तीपुर जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर और राज्य की राजधानी पटना से लगभग 108 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसका गठन 1951 में हुआ था और इसमें वारिसनगर और खानपुर प्रखंडों के साथ-साथ शिवाजी नगर की छह ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
🔸 जातीय समीकरण: कुशवाहा और कुर्मी समुदाय का बोलबाला
इस सीट पर कुशवाहा (कोरी) और कुर्मी समुदाय के वोटर चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि यहां प्रत्याशी चयन से लेकर राजनीतिक रणनीति तक सबकुछ इन समुदायों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
🔸 राजद और भाजपा का नहीं चलता जादू
वारिसनगर की राजनीति का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि राजद और भाजपा जैसे बड़े दल इस सीट पर लगभग गुमनाम हो चुके हैं।
- राजद ने 2010 के बाद से चुनाव लड़ना ही बंद कर दिया और अपने सहयोगियों को समर्थन देना शुरू किया।
- भाजपा ने भी अक्टूबर 2005 में दूसरी हार के बाद यही नीति अपनाई और जदयू-लोजपा को आगे रखा।
- कांग्रेस ने तो 1972 के बाद से कभी जीत नहीं देखी और अब जमानत जब्त करवा बैठी।
सीपीआई जैसे वाम दल भी लगातार असफलताओं के बाद पीछे हट चुके हैं।
🔸 अशोक कुमार (जदयू) की पकड़, पर वोट अंतर में गिरावट
जदयू के अशोक कुमार वर्ष 2010 से लगातार विधायक हैं। हालांकि, उनकी जीत का अंतर लगातार घटता जा रहा है:
- 2015 में जीत का अंतर था: 58,573 वोट
- 2020 में घटकर रह गया: 13,801 वोट
इस गिरावट की बड़ी वजह लोजपा की तीसरी ताकत के रूप में एंट्री मानी जा रही है, जिसने 2020 में 12.60% वोट हासिल कर जदयू के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई।
🌾 खेती और डेयरी है अर्थव्यवस्था की रीढ़
वारिसनगर गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित है, जहां की मिट्टी बेहद उपजाऊ है। पास की कमला और कोसी नदियों के कारण क्षेत्र कृषि उत्पादन में समृद्ध है।
- धान, गेहूं, मक्का और दालें मुख्य फसलें हैं
- आलू, प्याज, टमाटर, बैंगन और फूलगोभी जैसी सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है
- रोहुआ गांव खासतौर पर तंबाकू की खेती के लिए प्रसिद्ध है
- डेयरी उद्योग भी यहां की आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
कुल मिलाकर, क्षेत्र की 60-70% आबादी किसी न किसी रूप में कृषि या उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है।
🗓️ चुनाव कार्यक्रम
- मतदान तिथि: 6 नवंबर (पहला चरण)
- मतगणना: 14 नवंबर
निष्कर्ष:
वारिसनगर की राजनीति बताती है कि जहां एक ओर क्षेत्रीय दलों ने स्थानीय सामाजिक-आर्थिक समीकरणों को समझकर अपनी पकड़ बनाई है, वहीं राष्ट्रीय दल बिना संघर्ष के पीछे हट चुके हैं। अब देखना यह है कि 2025 के चुनावों में क्या कोई नई हवा चलती है, या फिर वारिसनगर अपने स्थायित्व और जातीय समीकरणों के आधार पर फिर से परिचित राह पर चलता है।



