
- रिपोर्ट: ज्ञानेश वर्मा
लखनऊ: कूर्मि क्षत्रिय सभा लखनऊ (राष्ट्रीय कार्य क्षेत्र) ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में आरक्षण से संबंधित नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र सौंपा है। सभा ने आरोप लगाया है कि आयोग द्वारा ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी.एम. कटियार ने अपने पत्रांक 327/2025, दिनांक 5 अक्टूबर 2025 के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की कि आयोग को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की तरह “माइग्रेशन नियम” का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए।
कटियार ने पत्र में कहा है कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार बिना आयु सीमा का लाभ लिए सामान्य वर्ग की कटऑफ के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे सामान्य वर्ग में शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इस नियम का पालन नहीं कर रहा है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित कम्बाइंड इंजीनियरिंग परीक्षा (प्रा.) के परिणाम में इसी आधार पर ओबीसी अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की थी। न्यायालय की एकल पीठ ने आयोग को संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिया, परंतु अगले ही दिन आयोग ने डिवीजन बेंच से इस आदेश पर स्थगन प्राप्त कर लिया। कटियार ने कहा कि डिवीजन बेंच का स्थगन आदेश “परीक्षा में अव्यवस्था” के आधार पर दिया गया, लेकिन इससे उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ जिन्हें अन्यायपूर्ण तरीके से बाहर किया गया है।
सभा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—
- लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में माइग्रेशन नियम के अनुरूप परिणाम घोषित किए जाएं।
- राज्य सरकार इसमें तत्काल हस्तक्षेप करे ताकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ हो रहे अन्याय को रोका जा सके।
- कम्बाइंड इंजीनियरिंग परीक्षा में बाहर किए गए अभ्यर्थियों को न्याय दिलाया जाए।
- आरओ/एआरओ परीक्षा में भी इसी नियम का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- आगामी 12 अक्टूबर को प्रस्तावित पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में भी माइग्रेशन नियम लागू कर परिणाम घोषित किए जाएं।
कूर्मि क्षत्रिय सभा ने इस मामले में लोक सेवा आयोग, प्रयागराज और प्रमुख सचिव (कार्मिक विभाग) को भी पत्र की प्रति भेजी है।



