
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
आगरा/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आगरा और लखनऊ नकली दवा सिंडिकेट के हॉटस्पॉट बन गए हैं। ड्रग विभाग और STF ने 22 अगस्त को 71 करोड़ रुपये की नकली दवाओं के खिलाफ बड़ी रेड की थी, लेकिन हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर ने विभाग की कार्रवाई को झटका दिया। फरार व्यापारी विक्की और सुभाष कुमार ने हाईकोर्ट से स्टे लेकर खुद को बचा लिया, जिससे ड्रग विभाग और STF की सारी मेहनत पर पानी फिर गया।
लखनऊ के न्यू बाबा फार्मा और पार्वती ट्रेडर्स जैसे प्रतिष्ठानों पर शिकंजा कसने की कोशिश की गई, लेकिन हाईकोर्ट के स्टे ने जांच को कमजोर कर दिया। आगरा के कोतवाली दवा बाजार से नकली दवाओं की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ, लेकिन सिस्टम की कमजोरी और स्टे ऑर्डर के चलते सिंडिकेट पर कार्रवाई अधूरी रह गई।
71 करोड़ रुपये की नकली दवाएं सीज की गईं, लेकिन फरार व्यापारियों को पकड़ने के दावे हवाई साबित हुए। हाईकोर्ट के स्टे ने नकली दवा माफिया को ढाल दे दी, जिसके चलते STF और ड्रग विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। जांच अब कोर्ट के स्टे में फंस चुकी है, और नकली दवा बाजार के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ती दिख रही है।



