
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के बाद जिला कारागार अलीगढ़ का नज़ारा बदला-बदला दिखा। जनपद न्यायाधीश विनय कुमार, डीएम राहुल पांडेय और एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा समेत पूरा प्रशासनिक अमला जेल में औचक निरीक्षण पर पहुंचा। उनके साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रशांत कुमार, सीजेएम जय हिन्द कुमार सिंह, सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह भी मौजूद रहे।
जेल अधीक्षक बृजेंद्र कुमार सिंह और जेलर कमलेन्द्र प्रताप सिंह पूरे दस्ते के साथ खड़े मिले। पूछताछ में खुलासा हुआ कि हाथरस जनपद से जुड़े 621 कैदी यहां बंद हैं – जिनमें 572 पुरुष, 39 महिलाएं, 10 किशोर और एक बच्चा अपनी मां के साथ रह रहा है।
निरीक्षण के दौरान जज ने पुरुष और महिला कैदियों से सीधे बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को फौरन समाधान के निर्देश दिए। हिस्ट्री टिकट चेक करने पर कई खामियां मिलीं – अग्रिम तारीख और वकील का नाम न लिखे होने पर सख्त नाराजगी जताई गई।
बैरकों, अस्पताल और पाकशाला का दौरा करते हुए टीम ने कैदियों के खाने-पीने और साफ-सफाई की व्यवस्था पर खास ध्यान दिया। महिलाओं की बैरक में मौजूद बच्चे के खान-पान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
जब जज साहब ने कैदियों से पूछा कि “आज खाने में क्या मिला?” तो कई कैदी खुलकर बोले। बीमार कैदियों से इलाज और दवा की जानकारी ली गई। साथ ही जेल प्रशासन को चेतावनी दी गई कि जातीय या धार्मिक भेदभाव का एक भी मामला सामने आया तो सख्त कार्रवाई होगी।
अंत में डीएम और एसपी समेत पूरी टीम ने जेल अधीक्षक को साफ हिदायत दी – “सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का कड़ाई से पालन हर हाल में होना चाहिए।”
साफ है कि इस औचक निरीक्षण ने जेल प्रशासन की धड़कनें तेज कर दीं और कैदियों को भी सीधे अपनी बात रखने का मौका मिल गया।



