
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में, पुलिस रिकॉर्ड्स और सार्वजनिक स्थानों से जाति के उल्लेख को पूरी तरह हटाने का फैसला किया गया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आदेश के प्रमुख बिंदु
- पुलिस दस्तावेजों से जाति हटेगी: एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में अब जाति का जिक्र नहीं होगा। इसके स्थान पर व्यक्ति के माता-पिता के नाम दर्ज किए जाएंगे।
- सार्वजनिक स्थानों से जातीय संकेतों का सफाया: पुलिस थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड्स से जाति से संबंधित सभी संकेत और नारे हटाए जाएंगे।
- जाति आधारित रैलियों पर रोक: जाति के आधार पर किसी भी तरह की रैली या प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
- सोशल मीडिया पर कड़ी नजर: सोशल मीडिया पर जातिगत टिप्पणियों और सामग्री की सख्त निगरानी की जाएगी।
- SC/ST एक्ट में छूट: अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) एक्ट से संबंधित मामलों में इस आदेश से छूट दी जाएगी।
- नियमावली में संशोधन: आदेश के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पुलिस नियमावली और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
सामाजिक समरसता की ओर कदम
यह फैसला सामाजिक समानता को बढ़ावा देने और जातिगत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कदम न केवल सामाजिक एकता को मजबूत करेगा, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करेगा।





