
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही मुहिम की हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। प्रवर्तन ज़ोन-1 में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए चार मंजिला अवैध व्यावसायिक भवन का निर्माण धड़ल्ले से जारी है, और वह भी प्राधिकरण की जानकारी व मिलीभगत के साथ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार भले ही कागज़ों पर अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दावा कर रहे हों, लेकिन जमीनी सच्चाई इसके उलट है। प्रवर्तन ज़ोन-1 में अवर अभियंता, सहायक अभियंता, ज़ोनल अधिकारी व विहित प्राधिकारी की दुरभि सन्धि (आपसी मिलीभगत) के चलते अवैध निर्माणकर्ताओं को खुली छूट मिली हुई है।
‘सील’ के बावजूद जारी है निर्माण
सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण द्वारा जिस निर्माण को अवैध घोषित कर सील किया गया था, वहां से सामान हटाने के नाम पर निर्माण कार्य लगातार जारी रखा गया। असल में, यह एक पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा था, जिसके तहत सील को केवल औपचारिकता बनाकर रख दिया गया, जबकि अंदर ही अंदर बहुमंजिला निर्माण कार्य पूरा करवाया जा रहा है।
प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत
इस पूरे मामले में प्रभावशाली बिल्डरों व अधिकारियों की साठगांठ की बात सामने आ रही है, जो एलडीए की कार्रवाई को ‘डील’ में बदलकर अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे हैं। यह न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि शहर की योजना व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।
सवालों के घेरे में एलडीए की साख
यह घटना न केवल एलडीए की पारदर्शिता और कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह सील जैसी गंभीर कार्रवाई भी सिर्फ दिखावा बन कर रह गई है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह व्यवस्था में भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी कर सकती है।





