
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या: जानकी घाट स्थित तपस्वी छावनी के प्रांगण में जगतगुरु परमहंसाचार्य के नेतृत्व में देव सनातन धर्म संसद का भव्य आयोजन किया गया। इस धर्म संसद में अयोध्या सहित विभिन्न क्षेत्रों के संत-महंत, धार्मिक गुरुओं और विशिष्ट जनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे, जो अब जगद्गुरु गोविंदाचार्य के नाम से जाने जाते हैं, उपस्थित रहे। इसके अलावा कई हिंदूवादी संगठनों के प्रतिनिधि भी इस संसद में शामिल हुए।
जगतगुरु परमहंसाचार्य ने बताया कि धर्म संसद में 10 सूत्रीय मांगों पर चर्चा की गई। चर्चा का मुख्य केंद्र भारतीय संस्कृति, गौ-संरक्षण और संवैधानिक सुधारों पर रहा।
धर्म संसद में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गईं:
- भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए
- गौवंश को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिया जाए
- रामायण और श्रीमद्भगवद गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए
- गोमांस भक्षण को मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों को समाप्त किया जाए
- गऊ और गंगा को भारत की संस्कृति का मूल बताया गया और इनकी रक्षा को सर्वोपरि बताया गया
सभा में मौजूद साधु-संतों ने एक स्वर में इन मांगों का समर्थन किया और कहा कि भारत की सनातन संस्कृति को बचाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक हैं।
धर्म संसद के समापन पर यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि हिंदू समाज को संगठित कर इन मांगों को केंद्र सरकार तक पहुँचाया जाएगा।





