
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: पेंशन की फाइलों में चल रहा गोलमाल रुकने का नाम नहीं ले रहा। ताज़ा मामला बेसिक शिक्षा विभाग का है, जहां आज बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने जिले के समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को लेटर जारी कर आदेश दिया है कि “अपने-अपने ब्लॉकों में जिन शिक्षकों के नाम पेंशन की सूची में आए हैं, उनकी पूरी जांच कर रिपोर्ट भेजें।”
लेकिन असली खेल यहां खुलता है!
सादाबाद खंड शिक्षा कार्यालय में बाबू राकेश वर्मा ने इस लेटर को शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में डाल दिया और खुद जांच करने के बजाय उन्हीं शिक्षकों से अपने बारे में जानकारी मांगनी शुरू कर दी। सवाल ये उठता है कि आखिर यह जिम्मेदारी शिक्षकों की है या फिर खंड शिक्षा अधिकारियों और विभागीय बाबुओं की?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब पहली बार पेंशन लिस्ट बनी थी, तब खंड शिक्षा अधिकारियों ने जांच क्यों नहीं की? बिना जांच के नाम लिस्ट में कैसे चढ़ गए और BSA ने उस पर साइन कर पूरे जिले में भेज भी दिया? अब जब मामला अखबारों और सोशल मीडिया में सुर्खियां बना, तभी विभाग हरकत में आया और दोबारा जांच की नौटंकी शुरू हो गई।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह सिर्फ लीपा-पोती है। “जिनकी गलती से गड़बड़ी हुई, उन पर कार्रवाई की जगह उन्हीं से जांच कराई जा रही है। इससे साफ है कि विभाग अंदरखाने बाबुओं को बचाने और जिम्मेदारी टालने में जुटा है।”
अब देखना ये है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस कब तक इस लापरवाही और मिलीभगत से राहत पाएंगे या फिर विभाग में ऐसे ही गोलमाल और ढिलाई का खेल चलता रहेगा?





