
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
- लेसा ने स्वीकार की लापरवाही, जांच रिपोर्ट में उजागर हुई खामियां
लखनऊ: हुसैनगंज के शंकरपुरी मोहल्ले में 27 जुलाई की दोपहर, आठ साल का मासूम फहद खेलते-खेलते बिजली के करंट का शिकार हो गया। घर में मातम, गली में खामोशी और पिता की आंखों में बस सवाल… आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी?
करीब तीन हफ्ते बाद, लखनऊ मध्य के विधायक रविदास मेहरोत्रा और आरटीआई एक्टिविस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार तनवीर अहमद सिद्दीकी की लगातार पैरवी ने सरकारी गलियारों की चुप्पी तोड़ी। विधानसभा में नियम 51 के तहत विधायक ने इस दर्दनाक घटना को जोरदार ढंग से उठाया और तत्काल आर्थिक मदद की मांग की।
दबाव बढ़ा तो गुरुवार को लखनऊ इलेक्ट्रिक सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन (लेसा) ने अपनी गलती स्वीकार कर पीड़ित परिवार के बैंक खाते में ₹5 लाख का मुआवज़ा ट्रांसफर कर दिया।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय की रिपोर्ट में साफ हुआ कि हादसे के वक्त ट्रांसफॉर्मर का सुरक्षा गेट खुला था और जाली भी नहीं लगी थी — एक ऐसी चूक, जिसने मासूम की जान ले ली। रिपोर्ट आने के बाद लेसा ने फीडर मैनेजर को निलंबित कर विभाग की लापरवाही पर मुहर लगा दी।
अधिशासी अभियंता अरुण कुमार (हुसैनगंज डिवीजन) ने मुआवज़ा भुगतान की पुष्टि की और कहा कि आगे ऐसे हादसों से बचने के लिए सुरक्षा इंतज़ाम कड़े किए जाएंगे।





