
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
शिमला: हिमाचल प्रदेश इस मानसून सीजन में भीषण तबाही झेल रहा है। राज्य में अब तक 30 बार बादल फटने और 58 बार बाढ़ जैसी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब तक 199 लोगों की मौत हो चुकी है।
राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून में 1952 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। 452 सड़कों पर यातायात पूरी तरह ठप है, जिससे कई इलाकों का संपर्क कट गया है।
प्राकृतिक आपदाएं बनी चुनौती
राज्य के विभिन्न हिस्सों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क धंसने और घरों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन खराब मौसम और अवरुद्ध सड़कों के चलते मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सरकार की अपील
राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें। साथ ही, प्रशासन ने आपदा प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर राहत शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। खासकर कांगड़ा, मंडी, चंबा और कुल्लू जैसे जिलों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
हिमाचल में मानसून की यह तबाही न केवल जन-धन की हानि कर रही है, बल्कि विकास कार्यों और पर्यटन पर भी बड़ा असर डाल रही है। राज्य सरकार के लिए यह संकट एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।





