
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहनों को प्रदेशभर में मुफ्त बस यात्रा की सौगात दी, ताकि कोई भी बहन अपने भाई तक पहुंचने से वंचित न रह जाए। इसके लिए परिवहन निगम के एमडी मासूम अली सरवर ने एक महीने पहले ही लखनऊ समेत सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को सख्त निर्देश जारी किए थे। आदेश था कि:
- सभी रूटों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध कराई जाएं
- हर रूट की मॉनिटरिंग की जाए
- आकस्मिक स्थिति में तुरंत अतिरिक्त बसें भेजी जाएं
- बसों का मेंटेनेंस समय से पूरा हो
लेकिन राजधानी लखनऊ में जमीनी हकीकत इन आदेशों से बिल्कुल अलग निकली।
चौराहों पर लगी रही यात्रियों की भीड़, लेकिन बसें नदारद
कमता, दुबग्गा, मड़ियाव और अहिमामऊ जैसे प्रमुख चौराहों पर सुबह से ही यात्रियों की लंबी कतारें नजर आईं। महिलाएं घंटों बस का इंतजार करती रहीं, छोटे बच्चे धूप में बिलखते रहे, बुजुर्ग थक कर फुटपाथों पर बैठ गए। कुछ बसें आईं भी तो पूरी तरह भरी हुई थीं। कई लोग निराश होकर लौट गए या महंगे निजी साधनों का सहारा लेना पड़ा।
लापरवाही की इंतहा: अधिकारी मौके से गायब, मेंटेनेंस अधूरा
- लखनऊ के क्षेत्रीय प्रबंधक आर.के. त्रिपाठी ने मीडिया में मामला सामने आने के बाद अतिरिक्त बसें भेजने की बात तो कही,
लेकिन मौके पर कोई अधिकारी नजर नहीं आया। - कई बसें कार्यशालाओं में अब भी अधूरे मेंटेनेंस के कारण खड़ी रहीं।
- आकस्मिक बसें भेजने की कोई तैयारी पहले से नहीं थी।
सवालों के घेरे में लखनऊ का क्षेत्रीय प्रबंधन
जहां मुख्यमंत्री और परिवहन निगम के एमडी ने योजना को सफल बनाने के लिए हर जरूरी इंतजाम किए, वहीं लखनऊ के क्षेत्रीय प्रबंधन की लापरवाही ने इस पहल की छवि को धूमिल कर दिया। न तो व्यवस्थाएं समय पर की गईं और न ही मौके पर किसी जिम्मेदार की मौजूदगी रही।
जवाबदेही तय होनी चाहिए
रक्षाबंधन जैसे संवेदनशील मौके पर जब सरकार खुद आगे आकर मुफ्त सेवा दे रही हो, तब ऐसी लापरवाही केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि आम जनता के साथ धोखा है।
अब सवाल उठता है —
जब मुख्यमंत्री और एमडी सक्रिय थे, तो लखनऊ का प्रबंधन क्यों नाकाम रहा?
इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि आगे ऐसी स्थिति दोबारा न हो।





