
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
“बच्चा नहीं, रिश्वत का लिफाफा पैदा होता है…” – दयालपुर के पीड़ित की एक पंक्ति, और पत्रकारिता ने कर दिया प्रशासन को बेनकाब।
हाथरस: मुरसान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक गरीब दंपती से ₹2700 की वसूली का मामला सामने आते ही समाचार टुडे 24 की टीम ने इस खबर को जनहित में उजागर किया। खबर के वायरल होते ही पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। जहां पहले अधिकारी चुप्पी साधे बैठे थे, वहीं अब समाचार टुडे 24 की खबर का सीधा असर दिखाई देने लगा है — रिश्वत लेने वाली संविदा नर्स नीरज का तबादला कर दिया गया है।
क्या था मामला – और कैसे मीडिया की ताकत बनी आवाज
दयालपुर निवासी हरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि 31 जुलाई को उनकी पत्नी मौनी देवी का मुरसान सीएचसी में प्रसव हुआ, जिसके बाद स्टाफ ने उनसे
- ₹2700 मांगे —
- ₹1500 नर्स के लिए
- ₹500 सफाईकर्मी
- ₹500 अन्य स्टाफ
- ₹200 फॉर्म के नाम पर
जब पीड़ित ने विरोध किया तो उसे बदतमीजी झेलनी पड़ी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह सरकारी सिस्टम को हिला देने वाला था।
समाचार टुडे 24 ने पोस्ट को खबर बनाया — वायरल होते ही डोल गया पूरा विभाग
हरेंद्र की सोशल मीडिया पोस्ट को समाचार टुडे 24 ने पड़ताल कर ठोस खबर में बदला।
हेडलाइन: “सरकारी अस्पताल में बच्चा नहीं, रिश्वत से भरा लिफाफा पैदा होता है!”
खबर प्रसारित होते ही प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई। पब्लिक, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी सबकी नजर इस खबर पर टिक गई।
अधिकारियों ने छिपाया ट्रांसफर लेटर — समाचार टुडे 24 ने ही उजागर किया
जब पत्रकारों ने इस मामले में जिम्मेदारों से ट्रांसफर आदेश की कॉपी मांगी तो साफ इनकार कर दिया गया। यह तक कह दिया गया कि:जिस अधिकारी के पास फाइल थी (CMO), वो छुट्टी पर चले गए हैं… आदेश नहीं दिया जा सकता।”
लेकिन समाचार टुडे 24 की टीम ने भरोसेमंद सूत्रों से मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हाथरस द्वारा जारी ट्रांसफर आदेश की असली कॉपी प्राप्त की — जो यह साबित करती है कि खबर का सीधा असर हुआ और प्रशासन ने दबाव में आकर कार्रवाई की।
आदेश की पुष्टि: नर्स नीरज का तबादला मुरसान से महौ सीएचसी
पत्रांक- गु०चि०अ०/स्टाफ नर्स संविदा स्थाना०/2025/4399
दिनांक: 02.08.2025
आदेश अनुसार — संविदा स्टाफ नर्स नीरज को तत्काल प्रभाव से मुरसान सीएचसी से कार्यमुक्त कर महौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थानांतरित किया गया है।
- यह सिर्फ तबादला नहीं – यह है जनता और पत्रकारिता की जीत!
- समाचार टुडे 24 की रिपोर्ट के बाद ही यह मामला प्रशासन के संज्ञान में मजबूरी से आया।
- जो ट्रांसफर लेटर छिपाया जा रहा था, वही मीडिया ने सबूत के साथ पेश किया।
यह इस बात का प्रमाण है कि जब मीडिया निष्पक्ष और निर्भीक होकर जनहित में काम करता है, तो सिस्टम भी झुकने को मजबूर होता है।





