
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
अपराध की राह पर चलने का अंजाम आखिरकार सिर्फ पछतावा ही होता है। ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य सामने आया, जब जेल में बंद एक युवक को उसके पिता के अंतिम संस्कार के लिए पुलिस सुरक्षा में श्मशान घाट लाया गया।
जैसे ही छोटे भाई ने बड़े भाई को देखा, दोनों भावनाओं में बह गए और एक-दूसरे से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगे। हथकड़ी लगे हाथों से बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं — चाहे वे परिवार के सदस्य हों, रिश्तेदार हों या फिर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि एक गहरा संदेश देती है —
“अपराध क्यों करते हो, जब अंत में अपनों से ही बिछड़ना पड़ता है?”
मां-बाप और परिवार घर में रोते हैं… और अपराधी, जेल में।
हर युवा को इस क्षण से सीख लेनी चाहिए कि गलत राह पर चलने का परिणाम केवल सजा नहीं, बल्कि अपनों से दूर हो जाने का वो दर्द भी होता है, जो ज़िंदगी भर साथ रहता है।





