
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय जिसमें यह तय किया गया है कि 50 से कम संख्या वाले प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों को निकट की विद्यालयों में पेयरिंग कर दी जाएगा। इस निर्णय से अनुमानता 27 हजार से अधिक विद्यालय पूरे प्रदेशभर में बंद हो जायेंगे। सरकार के इस अलोकतांत्रिक और शिक्षा विरोधी निर्णय के खिलाफ एनएसयूआई मध्यजोन के अध्यक्ष अनस रहमान एवं एनएसयूआई पूर्वीजोन के अध्यक्ष रिषभ पाण्डेय के संयुक्त नेतृत्व में आज एनएसयूआई के सैकड़ों छात्रों ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से विधानसभा का घेराव करने के लिए कूच किया, मौके पर उपस्थित पुलिस बल द्वारा कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की गई। आक्रोशित छात्र जब बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े तो एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं एवं पुलिस प्रशासन के बीच धक्का-मुक्की वा तीखी नोक-झोंक भी हुई।
इस मौके पर उपस्थित पत्रकार बन्धुओं के समक्ष अपनी बात रखते हुए एनएसयूआई मध्य जोन के अध्यक्ष अनस रहमान ने कहा कि कल्याणकारी राज्यों में सरकारों का लक्ष्य सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का होता है। इसी सोच के साथ पिछली सभी सरकारों ने कार्य किया है, इतना ही नहीं संविधान के 86वें संशोधन के तहत कांग्रेस सरकार ने शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया। मगर वर्तमान भाजपा सरकार ग्रामीण छात्रों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है ताकि वह सरकार की नीतियों के खिलाफ कोई आवाज न उठा सके।
अनस रहमान ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के द्वारा 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान किया गया। इस प्रकार सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के लिए समय-समय पर केंद्र सरकारों ने कई योजनाएं चलाई जिसके परिणामस्वरूप प्रत्येक किलोमीटर पर विद्यालय की स्थापना की गई। मगर उ0प्र0 की योगी सरकार बच्चों से शिक्षा का हक छीन लेना चाहती है और एक ऐसा प्रदेश बनाना चाहती है जहां शिक्षा के विद्यालय ना हो बल्कि नफरत की पाठशालायें हों।
अनस रहमान ने कहा कि यदि सरकार ने अपने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो अगले 25 दिनों में एनएसयूआई के द्वारा एक बड़ा आंदोलन किया जायेगा जिसमें एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरूण चौधरी जी भी शामिल होंगे।
एनएसयूआई पूर्वी जोन के अध्यक्ष रिषभ पाण्डेय ने कहा कि योगी सरकार निजी विद्यालयों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी विद्यालयों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में छात्र के प्रवेश की आयु 6 वर्ष है जबकि प्राइवेट विद्यालय 3 से 4 वर्ष में ही अपने यहां प्रवेश ले लेते हैं। एक बार जब बच्चा प्राइवेट विद्यालय में पहुंच जाता है फिर वहां से सरकारी प्राथमिक विद्यालय में लाना नामुमकिन हो जाता है। सरकार प्री प्राइमरी की शिक्षा आंगनबाड़ी केंद्रों में देने की बात करती है लेकिन यह केवल कागजों में ही हो रहा है।
उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत कहा गया है कि प्रत्येक सरकारी विद्यालय के 1 किलोमीटर के परिक्षेत्र में किसी प्राइवेट विद्यालय को मान्यता नहीं दी जाएगी लेकिन इसका उल्लंघन करके धड़ल्ले से मान्यता बांटी जा रही है। इसके साथ-साथ बिना मान्यता के भी प्राइवेट विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जो सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आज के प्रदर्शन में पूर्वी जोन के प्रभारी अनुराग त्रिवेदी, एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष आफताब जाफरी, आर्यन मिश्रा, अजय बागी, अहमद, तनु आर्या, निशात फातिमा, तौसीफ इलाही एवं अखिलेश यादव मुख्य रूप से शामिल रहे।





