
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली एक बार फिर सामने आई है — जो काम करेगा वही सिस्टम में टिकेगा।
इस बार मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ा एक्शन लिया है।
⚠️ 7 अधिकारियों पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री के निर्देश पर परती भूमि विकास विभाग ने
- 4 परियोजना प्रबंधकों और
- 3 अवर अभियंताओं
को प्रतिकूल प्रविष्टि (adverse entry) दी है।
यह कदम उन अफसरों पर उठाया गया है जो योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई और उदासीनता दिखा रहे थे।
🚨 अगली कार्रवाई और सख्त हो सकती है
विभाग की ओर से साफ चेतावनी दी गई है:
“यदि अब भी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो अगली कार्रवाई निलंबन या बर्खास्तगी तक हो सकती है।”
🔍 क्यों लिया गया यह निर्णय?
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 एक केंद्रीय महत्व की परियोजना है, जिसका मकसद किसानों को सिंचाई के लिए जल स्रोत उपलब्ध कराना और परती भूमि का दोबारा उपयोग सुनिश्चित करना है।
लेकिन कुछ अधिकारी इस योजना में सही क्रियान्वयन में विफल पाए गए, जिससे योजना की गति और प्रभावशीलता प्रभावित हो रही थी।
🗣️ संदेश साफ: जवाबदेही से ही टिकेगी नौकरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह सख्त रुख यह स्पष्ट करता है कि
➡️ सरकारी सेवा में लापरवाही की कोई जगह नहीं है।
➡️ परफॉर्म करो या बाहर हो जाओ, यही नीति अब पूरी तरह लागू की जा रही है।
📌 निष्कर्ष:
प्रदेश सरकार की योजनाओं में गुणवत्ता, गति और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सीएम योगी लगातार सक्रिय हैं। यह कार्रवाई न सिर्फ लापरवाह अधिकारियों के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत है कि अब सरकारी योजनाओं में कोताही का मतलब है – कड़ी सजा।





